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संगठन की शक्ति ईमानदारी, निष्ठा तथा अनुशासन में अंतरनिहीत
है
शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन कार्यकारिणी की बैठक 1953 के मार्च में बुधवार दिनांक 25 और गुरुवार, दिनांक 26 को दि८ी में अलीपुर रोड़ के डॉ. बाबासाहेब के घर पर तय की गई थी। फेडरेशन के अध्यक्ष आयु. एन. शिवराज की सेहत ठीक न होने के कारण वह दिल्ली नहीं आ सके थे। इसीलिए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की अध्यक्षता में उस बैठक का कामकाज हुआ।
इस बैठक में सांसद बापूसाहब राजभोज, उपसचिव आयु. दादासाहब गायकवाड़ (मुंबई), आयु. तिलकचंद कूरिल (उत्तर प्रदेश), विधायक ए. रत्नम (मद्रास), विधायक पी. एम. स्वामीदोराई (मैसूर), आयु. दशरथ पाटील, आयु. हरिदास आवले, और आयु. रेवाराम कवाड़े (मध्य प्रदेश), आयु. गंगाराम (मध्य भारत), सरदार हरवंत सिंह (पंजाब), विधायक मियांसिंह गिल (पेप्सू), मिल्कीराम (जम्मू और कश्मीर), आयु. बालमुकुंद (पंजाब) और स्वामी दर्शनानंदजी (दिल्ली) आदि सदस्य और आमंत्रित उपस्थित थे।
डॉ. बाबासाहेब ने मार्गदर्शन करते हुए कहा-
‘‘बहुजन समाज की उन्नति केवल बहुजन समाज के संगठन ताकत पर पर निर्भर करती है जितना संगठन तगड़ा और मजबूत होगा उनको जल्दी न्याय मिलेगा। सरकार की ओर से बहुजन समाज को जो रियायतें मिली हैं वे हमेशा के लिए नहीं हैं। कभी न कभी उनसे छिन जाएंगी। इसीलिए, इन रियायतों पर या कि सरकार की कृपा की मानसिकता पर निर्भर रह कर दलित समाज की उन्नति नहीं होगी। उसके लिए स्थिर, मजबूत और देशव्यापी संगठन की जरुरत है। इसीलिए, इसी कार्य की ओर अब शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन के सभी कार्यकर्ताओं को अपना ध्यान केंद्रित करना होगा। समाज के हर घटक के साथ निकट संबंध स्थापित कर उन्हें फेडरेशन के ध्वज के साथ लाकर
खड़ा करना है इस बात का निश्चय करके ही अपने काम की शुरुआत कीजिए। इसके अलावा दलित समाज के सामने अब कोई दूसरा रास्ता नहीं है।’’
कार्यकर्ताओं में मुख्यरूप से अनुशासन और ईमानदारी इन दो गुणों का होना जरुरी है। फेडरेशन की नीतियों के खिलाफ खुले आम अथवा गुप्त तरीके से काम करने वालों
जनता, 14 अप्रैल, 1953