310 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कम कर एकाद छुट्टी हमें भी दीजिए या फिर एकाध छुट्टी और बढ़ाइए। जवाहरलाल नेहरू के मन में बुद्ध के बारे में बहुत आदर है। संयोगवश से नेहरू सरकार ने बुद्ध जयंति की छुट्टी की घोषणा इसी वर्ष की है। लेकिन मुंबई सरकार ने नहीं दी। अपनी मुंबई सरकार बहुत सुसंस्कृत है। मुंबई सरकार यानी कल्चर ही कल्चर है। चाहे तो आप उसे ‘एग्रीकल्चर’ कहिए। ऐसी सरकार द्वारा छुट्टी न दिए जाने के कारण पांच बजे शुरू होने वाली यह सभा साढ़े सात बजे शुरू हो रही है।
बुद्ध का नाम लेते ही कुछ हिंदू लोगों को डर लगता था, कोई अपने ऊपर बम फेंक रहा है इस प्रकार का कोई डर उन्हें लगता था। उनमें से कई लोगों को ज्ञानप्राप्ति हुई है और आज वे बुद्ध का सम्मान कर रहे हैं। मैं कोई भविष्यवक्ता नहीं हूं, आगे क्या होगा यह मैं नहीं बता सकता, लेकिन एक बात निश्चित तौर पर कह सकता हूं कि बुद्ध का धर्म इस पृथ्वी पर फिर से अवतरित होगा। आज मैं नहीं बता सकता कि वह किस मार्ग से आएगा।
मैं बौद्ध धर्म का एक उपासक हूं। मैंने केवल बोध नहीं लिया है और न ही मैं केवल बोलता रहता हूं। मैं प्रत्यक्ष कृति करके दिखाऊंगा। मेरी जिंदगी के आखिरी दिनों में अब मैंने तय किया है कि मैं बुद्ध का प्रचार करूंगा। बुद्ध धर्म प्रचार की खेती मैं करूंगा और देखूंगा कि उसमें कौन-सी फसल उगती है। कई लोग मुझसे पूछते हैं कि बौद्ध धर्म के बारे में आपको आस्था क्यों है? डॉ. राधाकृष्णन जैसे बुद्धजीवी कहते हैं कि बौद्ध धर्म में ऐसी क्या विशेष बात है? उसमें और हिंदू धर्म में फर्क क्या है? हिंदू दार्शनिक कहते हैं कि बुद्ध ने उपनिषदों से ही सब कुछ लिया है। मुझे ऐसे लोगों के बारे में बहुत अचरज लगता है। जिन्होंने ब्राह्मणों के 138 उपनिषदों का अध्ययन किया होगा, उन्हें पूरा पढ़ा होगा उन्हें लगेगा कि उसमें ब्रह्म और आत्मा के अलावा और है ही क्या?
उपनिषदों के इस कारखाने की ब्रह्म और आत्मा इन दो बातों के बारे में बोलना हो तो बुद्ध ने इनमें से एक भी बात नहीं मानी। बुद्ध ने साफ तौर पर कहा कि मुझे ईश्वर नहीं चाहिए, परमेश्वर नहीं चाहिए। इस धरती पर जन्म लेने वाला हर आदमी सुख से और शांति से जिएं, बस मैं यही चाहता हूं। बुद्ध ने केवल शांति के बारे में ही बताया हो ऐसी बात नहीं है, बुद्ध सच्चा विचारक थे। उनके जैसा विचारक अब तक दुनिया में कोई हुआ ही नहीं।
बुद्ध को वेद बिल्कुल पसंद नहीं थे। उन्होंने यह साफ तौर पर कहा था। वर्णव्यवस्था भी बुद्ध को मान्य नहीं थी। बौद्ध साहित्य में बुद्ध ने चातुर्वर्ण्य पर हर बार प्रहार किए हैं और इसीलिए उसे कट्टर हिंदू धर्म से कठोर विरोध का सामना करना पड़ा। इस देश में तीन महत्वपूर्ण पंथ हैं। हिंदू, जैन और बौद्ध। जैनों के बारे में मैं कुछ भी कहना नहीं