314 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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चरित्र के बिना शिक्षा महत्वहीन
रावली कैंप महिला मंडल की विनति का सम्मान करते हुए पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार डा.ॅ बाबासाहेब अम्बेडकर आयुष्मति माईसाहब अम्बेडकर के साथ 3 जून, 1953 को शाम 7 बजे रावली कैंप पहुंचे।
इस अवसर पर बहुत बडी संख्या में जनसमुदाय इकठ्ठा हुआ था। पहले कई बहनों और संस्थाओं द्वारा डॉ. बाबासाहेब और आयुष्मति माईसाहब अम्बेडकर को फूलमालाएं पहनाकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा-
बहनों और भाइयों,
यहां की महिलाओं ने इमारत फंड में 1001 रुपया देना कबूल कर आज जो राशि दी है उसके लिए मैं तहे दिल से आभार व्यक्त करता हूं। मैं पहली बार इस बस्ती में आया हूं। इन महिलाओं ने जिस प्रकार मदद दी उसी तरह एक सोसाइटी भी इमारत फंड में मदद देने वाली है। इस सोसाइटी की कुछ राशि महापालिका में बाकी है। वही राशि वे इमारत फंड में देने वाले हैं। वह रकम आज तक इस बस्ती द्वारा दी गई सभी राशियों से ज्यादा है. उसे लेने के लिए एक बार फिर मुझे इस बस्ती में आना है और मैं जरूर आऊंगा।
अब मैं आपको एक महत्वपूर्ण बात बताने जा रहा हूं। परसों, यानी 27 मई, 1953 के दिन हमने बड़ी धूमधाम से बुद्ध जयंति मनाई। मुझे लगता है कि हमने यह बहुत अच्छा काम किया है। लेकिन कुछ अखबारों ने उसे अलग ही रूप दिया। जिस कार्यक्रम में 30000 लोग उपस्थित थे वहां आखों पर काली पट्टी बांधे हुए इन अखबारों ने केवल 3 हजार लोग ही उपस्थित होने की खबर छापी। कुछ अखबारों ने तो बुद्ध जयंति की खबर को अपने अखबार में जगह ही नहीं दी। वे हमेशा ऐसा ही करते हैं। डॉ. अम्बेडकर का कार्य कहते ही एक तो उसे प्रकाशित होने ही नहीं देना और अगर प्रकाशित किया भी तो वे उसे गौण या फिर उसे दुष्प्रचार के रूप में प्रकाशित करते हैं। बुद्ध जयंति के बारे में अखबारों में जो आलोचना प्रकाशित हुई है उसका मैं योग्य और विस्तार से जवाब देने वाला हूं। अखबार में छपी आलोचना आप अपने ऊपर असर होने
जनता, 13 जून, 1953