309 3-6-1953 चरित्र के बिना केवल शिक्षा की कीमत शून्य है - मुंबई - Page 336

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हरएक की काया-वाचा-मने त्रिशुद्धि होनी होगी। इस प्रकार पवित्र हुए व्यक्ति को अपवित्र कौन कहेगा। उनसे ज्यादा अगर आपके कपड़े अच्छे होंगे तो वे आपको कम क्यों आंकेंगे? अपनी उन्नति की कोशिश अब हमें खुद करनी होगी।

हमने धर्म के लिए सत्याग्रह किया। धर्मांतरण का प्रस्ताव किया। सब कुछ किया। अब हमें अपना मन पवित्र करना होगा। सद्गुणों की ओर हमारा झुकाव होना चाहिए। हमें इस प्रकार धार्मिक बनना होगा। हम पढ़े-लिखे तो हमने सब कुछ पाया ऐसा नहीं है। शिक्षा का महत्व है इसमें कोई शक नहीं। शिक्षा के साथ मनुष्य का चरित्र भी होना चाहिए। चरित्र के बगैर शिक्षा की कीमत केवल शून्य है। ज्ञान तलवार की तरह है। मान लीजिए किसी के हाथ में तलवार है उसका अच्छा या बुरा इस्तेमाल करना है यह उस व्यक्ति के चरित्र पर निर्भर करेगा। उस तलवार के सहारे वह किसी की हत्या कर सकता है या किसीका बचाव भी कर सकता है। ज्ञान का भी यही हाल है। अच्छे चरित्र का कोई पढ़ा-लिखा आदमी अपने ज्ञान का उपयोग औरों की अच्छाई के लिए करेगा, लेकिन अगर उसका चरित्र अच्छा न हो तो वह अपने ज्ञान का उपयोग किसी का बुरा करने के लिए भी इस्तेमाल कर सकता है। चरित्र धर्म का बहुत महत्वपूर्ण अंग है।

पढ़े-लिखे लोगों का केवल अपना पेट भरने वाले होना काफी नहीं है। जो लोग अपने स्वार्थ से परे थोड़ा भी नहीं देव सकते वे परमार्थ नहीं कर सकते उनके पढ़े-लिखे होने का फायदा ही क्या है? शिक्षा का उपयोग ज्ञान के कारण आपको आछा बुरा दिखाई देने लगता है। इसलिए ज्ञानी होना चाहिए।

ज्योतिबा फुले को मैं अपना गुरु मानता हूं। माली समाज में उनका जन्म हुआ। कई मराठा भी उनके शिष्य थे। लेकिन आज बड़े अजीब हालात हैं। आज कोई भी (मराठा, कुर्मी, माली, तेली, नाई और अन्य जातियां) ज्योतिबा का नाम नहीं लेते हैं। आज मांग, चमार लोग केवल जूठन के अधिकारी हो गए हैं। उन्नति के असली मालिक केवल हम हैं। आज हमारे साथ अन्याय हो रहा है। हम आंदोलन करते हैं इसलिए अन्य लोग हमारी ओर गुस्से से देखते हैं।

लेकिन हमारा आंदोलन निष्काम बुद्धि से और फल की आस के बगैर चल रहा है। हमे आशा है कि एक दिन ऐसा आएगा कि इस वृक्ष के हम भी मालिक बनेंगे। आज जो लोग बिना कुछ किए ऐश करते हैं, बिना खुद कमाए खा रहे हैं, आगे चल कर उन्हें खुद के किए पर शर्म आएगी।

एक और बात कह कर मैं अपनी बात पूरी करता हूं कि हरेक अपने घर में बुद्ध का फोटो लगाएं।