310 --7-1953 हमारे कार्यकर्त्ताओं को चाहिए कि वे राजनीतिक, धर्मिक और आर्थिक समस्याओं का बारीकी से अध्ययन करें - अज्ञात - Page 337

318 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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हमारे कार्यकर्त्ताओं को चाहिए कि वे राजनीतिक, धार्मिक और

आर्थिक समस्याओं का बारीकी से अध्ययन करें

जुलाई, 1953 में मराठवाड़ा शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन की ओर से मराठवाड़ा क्षेत्र के * कार्यकर्ताओं की हुई बैठक में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने मार्गदर्शन किया।

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अपने भाषण में कहा-

चुनाव ही राजनीति है ऐसा कार्यकर्ता मानने लगे हैं। यह भी माना जा रहा है कि चुनावों के बगैर राजनीति के कोई मायने नहीं हैं। इसीलिए चुनावों के समय सभी टिकट पाने के लिए कोशिशों में लगे रहते हैं और चुनावखत्म होते ही सब इत्मीनान से बैठ जाते हैं। लेकिन राजनीति कुल समाज-जीवन का एक छोटा अंग है। राजनीति यानि सबकुछ नहीं होता। सच पूछो तो राजनीति बाकी बचा हुआ अनाज है। समाज की उन्नति केवल राजनीति से नहीं होती। समाज की उन्नति के कई कारण होते हैं। सामाजिक, आर्थिक मसले कम महत्वपूर्ण नहीं होते। समाज की सर्वांगीण प्रगति के लिए इन सभी बातों की ओर एकसमान ध्यान देना जरूरी है यह बात कार्यकर्ताओं को समझनी है।

कार्यकर्ता जब राजनीति को ही महत्वपूर्ण मानते हैं तब उन्हें लगता है कि चुनाव के समय टिकट पाने के लिए जद्दोजहद करना, टिकट न मिलने पर समाज में फूट डालना, चुनाव हारने पर निराश होकर आराम से सो जाना और जीत जाएं तो एसेंब्ली में जाकर मुंह सिल कर बैठे रहना - राजनीति में इतना ही कार्य होता है।

हैदराबाद क्षेत्र में आज लगभग दो सालों से एसेंब्ली का कामकाज चल रहा है। इस क्षेत्र से आरक्षित जगहों पर कुल 31 उम्मीदवार अस्पृश्य समाज से चुन कर आए हैं। लेकिन इन दो सालों में वहां जाकर उन्होंने क्या किया? एसेंब्ली में तीन तरह से काम चलता है। एसेंब्ली में प्रस्ताव रखना, बिल रखना और बजट का अध्ययन कर उस पर बोलना। क्या इनमें से एकाध बात तो इन उम्मीदवारों में से किसी ने की है? कम से कम मेरे देखने में तो कुछ नहीं आया है। एसेंब्ली के कामकाज कीखबरें अखबार में नहीं आतीं शायद इसलिए मुझे उनके बारे में कुछ पता न हो। कहने का मतलब सिर्फ यही है कि एसेंब्ली में चुन कर जाने के बाद हमारे उम्मीदवारों को कम से कम ये बातें तो करनी ही चाहिए। कार्यकर्ताओं के सामने अगर राजनीति ही प्रमुख उद्देश्य रहा हो तो वहां भी उन्होंने कोई काम नहीं किया है। कम से कम मेरे देखने में तो यही आया है।

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के भाषणः संपादक मा. फ. गांजरे,खंड 7, पृष्ठ 99-103 * भाषण का स्थान दर्ज नहीं है।