320 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कहने का मतलब यही कि हमारे नेताओं पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।
लोगों में जागरूकता पैदा करना, उनका संगठनखड़ा करना बेहद महत्वपूर्ण काम है। हर नेता को यह काम करना होगा। हमारे कार्यकर्ताओं में बहुत धैर्य का होना जरुरी है। जिसमें धैर्य नहीं वह नेता नहीं बन सकता। जो आदमी मरने के लिए तैयार होता है वह कभी नहीं मरता है और जो मृत्यु स े डरता है वह पहले से मरा हुआ होता है। इस देश के हिंदू हमें बहुत तकलीफें देंगे। हमारी राह में कई रोड़े पैदा करेंगे। लेकिन जो भी हो, हमने जो राह अपनाई है, जिसे हम इंसानियत कहते हैं, उसे पाने की कोशिश हमें कभी नहीं छोड़नी है। इसीलिए हमारे हर कार्यकर्ता का धैर्यवान होना जरुरी है। हमें ध्यान में रखना होगा कि सम्मानजनक व्यवहार करना हमारा परमकर्तव्य है। हमारा आंदोलन उसी के लिए है। इसलिए कठिन परिश्रम के लिए आप सबखुद को तैयार करें।
दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे लोगों में अंधविश्वास बहुत हैं। जो भी उठता है पंढरी-पैठण-आलंदी के लिए निकल लेता है। मैं आपसे यह पूछना चाहता हूं कि पंढरी-पैठण-आलंदी जाकर हमने क्या हासिल किया है? पंढरपूर जाकर किसी का क्या भला हुआ है? या फिर, आलंदी जाकर किसी का उद्धार हुआ है क्या? आप एकनाथ को बहुत बड़ा मानते हैं, बताइए उसने क्या किया? भागवत ग्रंथ लिखा लेकिन उसकी कथा मैं आज आपको बताता हूं। वह मरा तब उसका जनाजा एक रास्ते से जा रहा था। उसी राह से एक गृहस्थिन महार को साथ लेकर ससुराल जा रही थी। उसने एकनाथ की लाश देखी। अपने साथ चल रहे महार से उसने कहा - मुझे अपशगुन हुआ है। उसने जो कहा वह एकनाथ की लाश ने सुना और वह उठ कर बैठी। उसने उस महिला से कहा, ‘मैं आज नहीं मरता, क्योंकि, मेरे कारण तुम्हें अपशगुन हो रहा है।’ इतना कह कर वह अपने घर चला गया। आगे, एकनाथ और उसकी पत्नी ने नदी में कूद कर जान दे दी। आज तक इस बात की किसी नेखोज नहीं की कि उन्होंने अपनी जानें क्यों दीं? अब आप ही बताइए, क्या कभी किसी की लाश को जिंदा होते हुए आपने देखा है?
दूसरी बात ज्ञानेश्वर की। उसने क्या किया? उसने भगवतगीता पर ज्ञानेश्वरी नाम का एक ग्रंथ लिखा। उस ग्रंथ का सारांश क्या है? दुनिया ब्रह्ममय है। अगर पूरी दुनिया ब्रह्म है तो महार-मांगों में भी ब्रह्म होना चाहिए। इसलिए ज्ञानेश्वर महार-मांगों में क्यों नहीं रहा? ब्राह्मणों द्वारा फिर से स्वीकृत होने के लिए उसने क्यों कोशिश की? ब्राह्मणों द्वारा उन्हें जब जाति से बाहर कर दिया गया तब उन्हें ब्राह्मणों से कहना चाहिए था कि आप अगर मुझे अपनी जाति में नहीं लेना चाहते तो ठीक है, मैं महार-मांगों के बीच जाकर रहूंगा, क्योंकि यह दुनिया ब्रह्ममय है। क्यों नहीं ज्ञानेश्वर ने ऐसा कहा? आम लोगों को बरगलाने के लिए यह सब भुलावे हैं और आप सब लोग इस झूठ के शिकार हैं। उसके भुलावे में आ गए हैं आप। इसलिए अगर आप पंढरी-जेजुरी-आलंदी जाएंगे या