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किसी अन्य देवता के भुलावे में आएंगे तो आपको जाति से बाहर करने की आज्ञा मुझे देनी पड़ेगी। उसके बगैर आपका पागलपन नहीं हटेगा। आपमें सुधार भी नहीं आएगा। आज का युग सोचने का युग है। कोई कैसा भी झूठ फैलाए, आपको पहचानना आना चाहिए कि यह झूठ है। क्योंकि, अब दुनिया में व्यवहार करते समय आपको विचारपूर्वक ही चलना होगा।
अपना संगठन हमें मजबूत बनाना होगा। सभी आपसी मतभेदों को भुलाना होगा। एक विचार के साथ चलना होगा। क्योंकि, बिना संगठन के दुनिया में हमें कोई नहीं पूछेगा। मैं जानता हूं कि चुनाव के समय हमें और किसी से हाथ मिलाना होगा। अगर हमारा संगठन ही नहीं होगा तो कोई हमारे पास नहीं आएगा। हमें कोई नहीं पूछेगा। राजनीति ही करनी हो तो वह अच्छे से करनी होगी। उसके लिए लोगों में जागरुकता पैदा कर मजबूत संगठन बनाना होगा। मुझे नेताओं का डर नहीं है। नेता अगर ठीक से पेश नहीं आए तो उन्हें निकाल देने में मैं नहीं डरूंगा, इसीलिए हर विभाग में सालाना एक बार तो परिषद का आयोजन किया जाना जरूरी है। उसी प्रकार, सभा, सम्मेलन, चर्चा सत्र, कैंप्स आदि का आयोजन करते रहना चाहिए। इसलिए उस बहाने हमारे कार्यकर्ता एक साथ होंगे। आंदोलन के बारे में अध्ययन करेंगे। जोशखरोश से काम होगा।
आखिर मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि मैं व्यक्तिगत तौर पर किसी कार्यकर्ता से प्रेम नहीं करता। प्रेम केवल कार्य से ही होता है। जो काम करता है वही मुझे पसंद आता है।