322 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
311
शेर बनें ताकि आपका रास्ता काटने
की किसी में हिम्मत न हो
दिनांक 9 अगस्त, 1953 के दिन औरंगाबाद के गड़डीगुडम छावनी क्षेत्र के पास शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन की समिति की ओर से आयु. दाभाडे, कांबले, मल्हारराव ने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को अल्पाहार कराया। इस अवसर पर मुंबई राज्य शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष कर्मवीर दादासाहब गायकवाड़, मध्यप्रांत शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन के उपसचिव आयु. बाबू हरिदास आवले, नासिक के रामपाला, विधायक नेरलीकर, उपसचिव मराठवाड़ा, पी. ई. एस. कॉलेज के रजिस्ट्रार आयु. वराले. आयु. बी. एस. मोरे, नगर के आयु. पी. जे. रोहम आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे।
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को बताया गया कि गांव की अस्पृश्य जनता की ओर से सरकार द्वारा जमीनें वापिस ली जा रही हैं। इस अवसर पर डॉ. बाबासाहेब ने कहा-
आप कुछ करते नहीं इसीलिए सरकार ऐसा करती है। उन्होंने उपनिषद की एक कहानी उदाहरण के तौर पर बताई - भेड़ को कोई भी काटता है इसलिए भेड़ शिकायत करने पहुंची। तब भगवान ने उससे कहा कि तुम्हारा मांस थोडा नरम है। इसीलिए मैं तुम्हेंखाना पसंद करता हूं। भगवान ने सवाल किया कि क्या कोई शेर को, सियार को
खाता है? नहीं। इसलिए, तुम भी उसी की तरह बनो। कोई तुम्हें परेशान नहीं करेगा। मुसलमान को कोई परेशान करता है क्या? नहीं, क्योंकि उसके पास छुरा है यह लोग जानते हैं।खाट पर बैठे रह कर नहीं चलेगा। आप भी अर्जियों अथवा निवेदनों पर निर्भर मत रहिए। हिम्मतवान बनें।खाली पेट रहने के बजाय बंजर जमीन पाएं।
उपस्थित मेहमानों के प्रति आभार प्रकट करने के बाद यह कार्यक्रम संपन्न हुआ।
जनताः 15 अगस्त, 1953