327
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा-
इस काम को हाथ में लेने के लिए मैं आयु. अत्रे का अभिनंदन करता हूं। क्योंकि ज्योतीराव फुले असल में आद्य समाज सुधारक हैं। पहले विवाद चलता था कि पहले राजनीति या कि पहले समाज सुधार। रानडे, गोखले, आगरकर का आग्रह था कि पहले सामाजिक सुधार होने चाहिए। लेकिन तिलक के मत में पहले राजनीतिक सुधार होना ही सही था। तिलक इस मामले में अपने विरोधियों पर विजय नहीं पा सके। लेकिन आगे चल कर गांधीजी ने उन पर विजय पाई जो पहले समाज में सुधार लाने के समर्थक थे। हालांकि समाज सुधार होने से पहले ही देश को राजनीतिक आजादी मिली। इसका कुछ अच्छा असर नहीं हुआ है। आज देश का कोई चरित्र नहीं बचा है और जिस देश की कोई नैतिकता नहीं उस देश का भविष्य बहुत ही कठिन होता है। जवाहरलाल नेहरू, आपके राज्य के मुख्यमंत्री हों या मोरारजी देसाई हों, आपके भविष्य में अंधःकार ही भरा हुआ है। देश के मंत्री देश का उद्धार नहीं कर सकते बल्कि जिसे धर्म समझ में आया है वही देश का उद्धार कर सकता है। महात्मा फुले ऐसे ही धर्मसुधारकों में से एक थे। इस प्रकार इस महान समाजसुधारक के जीवन पर बनने वाली यह फिल्म उपयुक्त साबित होगी।