315 20-4-1954 धर्म की तरह राजनीति में निष्ठा का पालन न किया जाए तो राजनीति लफंगों का बाजार साबित होगी - नागपूर - Page 348

 329

संस्था से आयु. भोसले, और शे. का. फे. चे. आयु. राजभोज, दादासाहब गायकवाड, मुं. वि. सभा के और शे. का. फे. के सदस्य आयु. बापू चंद्रसेन कांबले, बॅ.खोब्रागडे, नागपूर कार्पोरेशन के उपनगराध्यक्ष आयु. धरमदास में श्राम और हरिदास आवले आदि प्रतिष्ठिता कार्यकर्ता उपस्थित थे।

दिनांक 20 अप्रैल, 1954 को अपने स्वागत समारोह में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा-

मुझे लग रहा है कि राष्ट्र विनाश के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। इसीलिए मैं चुनाव मेंखड़ा हो रहा हूं। काँग्रेस के साथ सुलह के लिए तैयार होता तो मेरा लोकसभा में टिका रहना असंभव नहीं था। लेकिन धर्म की तरह ही अगर राजनीति में भी निश का पालन नहीं किया गया तो वह लफंगों का बाजार ही रहेगा। विरोधी पार्टी की सीटों पर से लोगों के सामने अलग दृष्टिकोण रखने के लिए ही मैं यह चुनाव लड़ रहा हूं।

काँग्रेस सरकार को कार्य करने के लिए बहुत समय दिया गया लेकिन अब तक वे कोई भी सवाल हल नहीं कर पाए हैं। अब केवल भक्तिभाव रख कर नहीं चलेगा। अब जागरुकता से घटनाओं पर ध्यान रखना होगा। पहले देश फिर प्रधानमंत्री और काँग्रेस इस तरह से देखना होगा। आज लोगों का कर्तव्य है कि वे वर्तमान सरकार बदल लें।

आज दुनिया में भारत का कोई दोस्त नहीं रहा है। हिटलर की जर्मनी को जैसे घेर लिया गया था वैसा ही कुछ यहां हो रहा है। पाकिस्तान को अमेरिका से मिल रही सैनिकी मदद बहुत गंभीर बात है। उसका बड़ा गंभीर असर होगा। पाकिस्तान को इस प्रकार की मदद जब मिल रही है तब यहां-वहां बिखरे अन्यखंडित मुस्लिम राष्ट्र भी एक होंगे और उनके ‘इस्लामी संयुक्त राज्य’ की स्थापना होगी, यह तो समझने वाली बात है। ये इस्लामी संयुक्त राज्य अपने पूरे राष्ट्र को घेर लेंगे। मैं आपको यह चेतावनी भी देना चाहूंगा कि अफगानिस्तान ने भी अमेरिकी मदद स्वीकारी है और प्रस्तावित अफगाण-पाक फेडरेशन कीखबरों के बारे में जो इनकार किया जा रहा है वह केवल गुमराह करने वाली बात है। दूसरी ओर एशिया को काबीज कर उसे कम्युनिजम राष्ट्रों के साथ लाने के लिए रशिया और चीन भी तैयारखड़े हैं और दांव-पेंच लड़ा रहे हैं।

इसलिए, अगर आप प्रभावी बनना चाहते हैं तो आपको हाथ में बंदूकें लेनी होंगी। नरम, लिजलिजे भाषणों से काम नहीं चलेगा। आपको कोई एक कठोर भूमिका अपनानी होगी। बात इसी पर निर्भर है कि आप पार्लिमेंटरी सरकार चाहते हैं या नहीं। पार्लिमेंटरी सरकार चाहिए तो जहां पार्लिमेंटरी सरकार है और बाह्य आक्रमणों के खिलाफ सुरक्षा के लिए जो सिद्ध हैं हमें उनसे के लिए सहयोग करना होगा। अगर नहीं तो हम कल ही रशिया और चीन के साथ दोस्ती करेंगे।