330 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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चुनावों द्वारा सीटें पाना एक साधन है, साध्य नहीं
दिनांक 20 अप्रैल, 1954 शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन के कार्यकर्ताओं को हितोपदेश करते हुए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा,
पिछले चुनावों में शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन की हुई हार के कारण मेरे सहयोगी हताश हुए होंगे शायद और हो सकता है कुछ लोग यह भी सोच रहे हों कि चुनाव नहीं होने चाहिए। लेकिन, मैं उनसे कहूंगा कि इस प्रकार हतबल या निराश नहीं होना चाहिए। राजनीति इसी प्रकार सीढ़ी-दर-सीढ़ी आगे बढ़ती रहती है। मैंने कभी भी हार की परवाह नहीं की_ करता भी नहीं और कभी करूंगा भी नहीं। केवल चुनावों में जीत पाना ही फेडरेशन का उद्देश्य नहीं है। लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागृत करना और संघर्ष करने के लिए प्रेरित करना यह इस चुनावों में उम्मीदवारखड़े करके मैं कर रहा हूं। चुनावों के द्वारा सीटें पाना एक साधन भर है। फेडरेशन का साध्य और उद्देश्य अस्पृश्य जनता का उद्धार करना है और जब तक अस्पृश्य समाज का सभी अंगों से विकास नहीं होता तब तक शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन पार्टी की जरुरत है और फेडरेशन तब तक जीवित रहेगी यह मैं जोर देकर कहता हूं। जो छोटे-मोटे तूफान उठे होंगे वे हवा बहना बंद होने पर थम जाएंगे। उनके बारे में चिंतित होने की जरुरत नहीं है। फेडरेशन पार्टी के बगैर भारतीय राजनीति में अस्पृश्यों के लिए स्वाभिमान का स्थान नहीं बचेगा। फेडरेशन की पराजय के कारण ही दिनों-दिन हमें अपने उद्धार के लिए नए-नए कार्यक्रम बनाने पड़ते हैं। जो फेडरेशन के कार्यकर्ता हैं उन पर बड़ी जिम्मेदारी है। उन सबसे मैं यह कहना चाहता हूं कि फेडरेशन की पराजय हवा से उजड़े पेड़ की तरह है। लेकिन इस तरह उजड़ने से उस पेड़ की जड़ें ही मिट गई होंगी यह सोचना गलत होगा। इसलिए कहता हूं कि आंखेंखुली रख कर काम करते रहिए।
जनताः 24 अप्रैल, 1954