331
317
हमारा देश दो हिस्सों में बंटा है - एक ऊंचे लोगों का, दूसरा
छोटे लोगों का
भण्डारा संसद के उप-चुनाव मेंखड़े हुए चारों उम्मीदवारों का चुनाव अब चरम पर पहुंच गया था। दिनांक 21 अप्रैल, 1954 को नागपुर से भण्डारा चुनाव प्रचार के लिए आये। शाम को उनकी सार्वजनिक सभा हुई। बीस-बीस, पच्चीस कोस से बाबासाहेब के दर्शन के लिए इक्ट्ठा हुए।
शाम 7 बजे डॉ. बाबासाहेब नए तालाब के पास विशाल मैदन में आए। इस मैदान में बड़ा शामियाना लगाया गया था। दूर-दूर से आए लोग डॉ. बाबासाहेब के स्वागत के लिए बहुत ही उत्सुक थे बाबासाहेब के सभास्थल पर आते ही इन नारों से वातावरण गूंजने लगा ’बाबासाहेब जिंदाबाद’, बाबासाहेब कौन हैं? हमारे राजा हैं।’
कार्यक्रम की शुरूआत भजन से हुई। भजनों का कार्यक्रम चल ही रहा था तभी साथ में कई संस्थाओं और व्यक्तियों की तरफ से डॉ. बाबासाहेब को पुष्पमालाएं अर्पण किए गए। डॉ. बाबासाहेब के साथ माईसाहब आयु. कांबळे, उपसचिव आयु. राजभोज दादासाहब गायकवाड़ आदि लोग मंच पर उपस्थित थे। म. प्र. शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन के अध्यक्ष आयु. दशरथ पाटील, आयु. निनावे वकील, आयु. भाऊसाहब दलाल आयु. ना. ह. कुंभारे, आयु. आवले, बॉ.खोब्रागडे आदि लोग मंच पर उपस्थित थे।
मंच से उपस्थित जनसमुदाय की ओर देखते ही सबको जवाहरलाल नेहरू की सभा की याद आ रही थी। कम से कम दो लाख लोग बड़े उत्साह के साथ इस समारोह में उपस्थित थे। भंडारा में इससे पूर्व कभी इतनी बड़ी सार्वजनिक सभा नहीं हुई थी।
पुष्पमालाएं अर्पण करने का कार्यक्रम पूरा होने के बाद डॉ. बाबासाहेब को शुभकामनाएं देने वाला उन्हें चुनाव में बहुमत से जिताने वाले एक गीत का बुलंद आवाज में सुस्वर गायन हुआ।
इस सभा में डॉ. बाबासाहेब के प्रति अपना आदर व्यक्त करने के लिए कारंजा के आयु. महादेव बोरकर ने 501 रु. आयु. चंद्रभान श्यामकुंवर ने 101 रु. अर्पण किए।
पहले नागपुर प्रदेश शे. का. फे. के अध्यक्ष बॅ.खोब्रागडे ने शुरुआती परिचयात्मक भाषण से उपचुनावों की भूमिका संक्षेप में स्पष्ट की।
तरुण भारत, नागपूरः 23 अप्रैल, 1954