16 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मुंबई में 3 जनवरी, 1946 को हुए प्राथमिक चुनावों के दिन शहीद चोखाजी सावलाराम गांगुर्डे इनकी काँग्रेस के गुंडों द्वारा की गई निर्मम हत्या और इस शहीद की शवयात्रा पर 4 जनवरी, 1946 को पुलिस द्वारा किया गया अमानवीय लाठीचार्ज, उसमें मृत हुए वीर रामचंद्र गुंडू कांबले और उसके बाद मुंबई में जगह जगह अस्पृश्यों की बस्तियों पर किए गए आक्रामक हमले आदि घटनाओं के बारे में ‘डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर क्या कहते हैं?’ सुनने के लिए मुंबई की अस्पृश्य जनता बेहद आतुर थी। डॉ. बाबासाहेब का यह महत्वपूर्ण भाषण सुनने के लिए मुंबई (शहर और उपनगर) शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन शाखा के कार्यकर्ताओं ने दो बार जनता के सामने सभा की तारीख का भी ऐलान किया था। लेकिन दोनों बार व्यस्तता के कारण बाबासाहेब का आना संभव नहीं हो पाया, इसलिए दो बार सभा को स्थगित करना पड़ा। तीसरी बार 17 फरवरी, 1946 के दिन सभा हुई और इस सभा की पूरी मुंबई में धूम मची।
अखिल भारतीय शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन का तीसरा अधिवेशन जहां सफलतापूर्वक संपन्न हुआ उसी रमाबाई अम्बेडकर नगर में (नरेपार्क) इस विराट सभा का आयोजन किया गया था। डॉ. बाबासाहब, सम्माननीय अतिथिगण, उम्मीदवार, फेडरेशन के विभिन्न वार्डों के कमेटी सदस्य तथा प्रमुव कार्यकर्ता आदि के लिए विशेष पंडाल सजाया गया था।
इस सभा में प्रवेश के लिए आठ आने का टिकट लगाया गया था, जिसकी पहले से घोषणा की गई थी। पंडाल में प्रवेश के लिए पांच अलग-अलग प्रवेशद्वार रखे गए थे, जिनमें एक आमंत्रितों के लिए था, एक महिलाओं के लिए और तीन पुरुषों के लिए। हर प्रवेश द्वार पर तैनात कार्यकर्ता अपना काम बढि़या ढंग से कर रहे थे। दोपहर तीन बजे से ही लोग आने लगे थे। दूसरे शहरों से कई लोग विशेष रूप से बाबासाहेब का भाषण सुनने आए थे। पांच बजे तक करीब तीस हजार लोग नगर में दाखिल हो चुके थे। जिनके पास टिकट नहीं थे वे पंडाल के बाहर ही घूम रहे थे। मंच पर मुंबई प्रांतिक विधिमंडल के आने वाले चुनावों में खडे फेडरेशन के अधिकृत उम्मीदवार गुरुवर्य दोंदे और बाबासाहेब के अस्पृश्य समाज के परिचित मित्र तथा बायीं तरफ वार्ड कमेटियों के सदस्य, दाहिनी तरफ महिलाएं, आगे मंच से सटे अखबारों के संवाददाता और सामने अपार जनसमुदाय इस प्रकार वहां समां बंधा था।
डॉ. बाबासाहेब के आगमन से पूर्व कु. गोदावरी, मा. रोकडे, तथा रामचंद्र ने समाज की उन्नति पर आधारित कुछ गीत गाए।
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ठीक साढ़े-पांच बजे आए। उनके आने की खबर मिलते ही तालियों की गड़गड़ाहट और तरह-तरह के जयघोषों की आवाजों से माहौल चेतनाशील हो गया। समता सैनिक दल के कामकाज को देखने की बात पहले से तय थी, इसलिए आते ही डॉ. बाबासाहेब समता सैनिक दल की रैली की तरफ मुड़े। समता सैनिक दल के सैनिकों