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को इस बात की जानकारी पहले से थी इसलिए हर सैनिक पूरी तैयारी के साथ आया था। सभास्थल से लगे विस्तीर्ण मैदान में सब समता सैनिक अनुशासन के साथ खड़े थे। शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन के सैनिकों का मिलिट्री जैसा अनुशासन जो देखता वह अचंभित ही रह जाता। डॉ. बाबासाहेब के साथ मुंबई शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन शाखा के अध्यक्ष श्री जी. एम. जाधव और मुंबई के समता सैनिक दल के जी. ओ. सी. श्री एम. एम. ससालेकर थे। सभा स्थल पर बाबासाहेब का आगमन होते ही बिगुल बजा। बैंड बजने के साथ-साथ डॉ. बाबासाहेब को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ का सम्मान दिया गया। उसके बाद डॉ. बाबासाहेब ने समता सैनिक दल का मुआयना किया। मुआयना करते समय डॉ. बाबासाहेब के चेहरे पर संतोष के भाव थे। चलते-चलते वह सैनिकों से बातचीत करते, कभी सैनिकों से जानकारी प्राप्त करते। जी. ओ. सी. ससालेकर उनके सवालों के जवाब देते। इस प्रकार समता सैनिक दल का मुआयना कर डॉ. बाबासाहेब मंच पर विराजमान हुए। एक बार फिर तालियों की गड़गड़ाहट हुई। डॉ. बाबासाहेब जब अपनी जगह पर विराजमान हुए तब जी. ओ. सी. ससालेकर ने समता सैनिक दल की ‘प्रतिज्ञा’ पढ़ कर सुनाई जो हर सैनिक को समता सैनिक दल में शामिल होते समय लेनी पड़ती है।
मुंबई और उपनगर शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन शाखा के अध्यक्ष श्री जी. एम. जाधव बनाम मडकेबुवा ने डॉ. बाबासाहेब को पुष्पमाला अर्पण कर स्वागत किया। लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट कर उनका साथ दिया। उसके बाद नायगाव के ‘महाराष्ट्र अमॅचर्स पार्टी’ के छोटे बच्चों द्वारा मुंबई में लोकप्रिय गीत . ‘चल चल रे दलित वीरा’ मीठे सुरों में प्रस्तुत किया।
तब तक बाहर बड़ी भीड़ इकठ्ठा हो चुकी थी। डॉ. बाबासाहेब ने सबको पंडाल में दाखिल होने को कहा। सुनते ही लोगों का हुजूम अंदर आने लगा। उस वक्त सभास्थान पर बहुत ह८ा मचा। करीब पौन लाख से अधिक लोग उस भीड़ में शामिल थे। फिर शांति स्थापित करने में करीब पांच मिनट लगे। उसके बाद मडकेबुवा ने मुंबई प्रांतिक शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन शाखा के अध्यक्ष और नासिक जिले के अपने अधिकृत उम्मीदवार श्री भाऊराव कृष्णराव बनाम दादासाहेब गायकवाड़ को अपनी बात रखने मंच पर बुलाया। दादासाहब गायकवाड़ बहुत कम बोले लेकिन जो भी बोले वह दुश्मन के सीने पर सीधे वार करने जैसा था। भाषण में आने वाले चुनावों में अपना कर्तव्य, अपने ही उम्मीदवारों को बहुमत से जिताने की आवश्यकता, प्राथमिक चुनावों के परिणामों द्वारा मिला अस्पृश्यों की एकजुट का आहवान, काँग्रेस की जंघा में चमजूई की तरह पलने वाले अपने विरोधियों की अधोगति आदि विषयों पर संक्षेप में बोले। पिछले हफते मद्रास में गांधी ने अस्पृश्यों के स्वाभिमान को कुरेदने वाले जो अपमानजनक बात कही उसके बारे में उन्होंने खूब बुरा-भला सुनाया। उसके बाद थैली अर्पण करने का समारोह हुआ। श्री मडकेबुवा ने डॉ. बाबासाहेब को सत्रह हजार रुपयों की थैली अर्पण की। उस समय