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सर्वोदय मुझे ढोंग लगता है। एक आदमी कैसे सर्वोदय ला सकता है समझ में नहीं आता। व्यवहार में ‘मात्स्य न्याय’ है। सबका हित देखना होगा। उनके इस कथन पर क्या आप भरोसा कर सकते हैं? सर्वोदय के साथ मुझे विश्वामित्र की याद आती है। ब्रह्मदेव के साथ होड़ लगाकर प्रतिसृष्टि का निर्माण किया। उसका वर्णन करते हुए मुक्तेश्वर ने कहा है कि विश्वामित्र की दुनिया में जन्मजात एक-दूसरे के दुश्मन नेवला और सांप प्रेम से क्रीड़ा कर रहे थे। चूहे बि८ी का दूध पी रहे थे और सिंह और हाथी प्रेम से साथ रह रहे थे। वास्तव में ऐसा कभी संभव नहीं। लेकिन कवि मुक्तेश्वर आगे बताते हैं कि यह सब कपटजाल था। सर्वोदय मजदूरों के साथ अमीरों का हित देखने वाला होगा उन्हें प्रेम के साथ इक्ट्ठा बसाने वाला होगा तो कहना पड़ेगा कि यह तो कपटजाल है।
घूसखोरी क्यों होती है? तो इसके पीछे वजह यह है कि जवाहरलाल नेहरू में कोई दम नहीं है।खुद नेहरू ईमानदार हैं। मुझे उनके बारे में कुछ नहीं कहना है लेकिन उनका एक ही दोष है कि वे अगर किसी को एक बार दोस्त मान लेते हैं तो हमेशा के लिए शरण दे देते हैं। मेनन का जीप मामला तो मशहूर ही है। मंत्रिमंडल में मैं जब था तब मैंने जवाहरलाल नेहरू से कहा था कि हर जगह आप वकीलों की नियुक्ति क्यों करते हैं? हर साल इन दूतावासों पर 8 करोड़ रुपएखर्च किए जाते हैं। आप नहीं जानते हों तो मैं बता दूं कि अमेरिका और कनाडा की सरकारों ने मांग की है कि ‘अपने वकीलों को वापिस बुला लो’ तुर्कीस्तान के वकील ने अनाज कीखरीदारी में घपला किया। विदेशों में जिन लोगों ने अपना और अपने देश का नाम बदनाम किया उन्हें वापिस लौटने पर यहां क्या सजा मिलती है? ऐसे एक आदमी को उसके भारत लौटने पर अपराधी ठहराया गया और फिर दूसरे देश में वकील बना कर भेजा गया। जवाहरलाल नेहरू लोगों को परख नहीं सकते। अपने पसंदीदा लोग और देश के हित में क्या कोई फर्क नहीं? लेकिन जवाहरलाल नेहरू की समझ में यह फर्क नहीं आता। क्या ऐसे आदमी का हमें समर्थन करना चाहिए?
300 साल पहले पंडितजी के पूर्वज भारत में आए। लेकिन आज भी उन्हें लगता है कि हम पहले कश्मिरी हैं फिर भारतीय। तब मुझे आश्चर्य लगता है कि जो आदमी पहले अपने को गर्व के साथ भारतीय नहीं कहलाता उसे भारत का प्रधानमंत्री बनने का अधिकार ही क्या है?
कश्मीर के लिए पूरे भारत का कहां तकखून चूसें यह वे नहीं सोचते। कश्मीर के राजा की सालाना 9 लाख की तनख्वाह है। 3 लाख रुपए ही कश्मीर की सरकार देती है। 6 लाख भारत सरकार देश की जनता से वसूली कर की रकम में से देती है। मैं अगर चुनाव जीत गया तो जाकर उनसे पूछने वाला हूं कि पिछले सात सालों में कश्मीर की अपनी सेना पर कितनाखर्च हुआ है? उन्होंने जान बूझ कर इस बात को गुप्त रखा