334 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
है। मेरी राय में यहखर्च 200 करोड़ से अधिक होगा। एक तरफ भारत की जनता जब भूखों मर रही है तब इतना पैसा वहांखर्च क्यों करें तो कैसे यह विचार कभी उनके मन में नहीं आता।
किसी अन्य द्वारा सुझाई गई अच्छी बात को स्वीकारने के लिए भी जवाहरलाल नेहरू तैयार नहीं हैं और कोई नई बात सूझे ऐसी उनकी अपनी बुद्धि नहीं है।
आजकल लोग फिल्मी स्टारों के पीछे पागल होते हैं उसी प्रकार जवाहरलाल नेहरू के पीछे पागल हुए हैं। हालांकि फिल्म के स्टार के पीछे पागल होने वाला युवक घर आकर अपनी घरवाली से प्रेम करता है और सुखी होता है। नेहरू के बारे में लेकिन ऐसा नहीं होता। जो लोग उन्हें पसंद करते हैं वे उन्हीं से चिपके बैठे रहते हैं।
महाभारत में बताया गया है कि द्रोण और भीष्म कहते कि पांडव सही हैं लेकिन ऐन लड़ाई के समय वे कौरवों की तरफ से लड़ें। लोगों ने सवाल पूछे तो भीष्म ने दो टूक जवाब दिया कि ‘‘अर्थस्य पुरुषो दासः’’। आज अमीर मारवाड़ी दिलखोल कर काँग्रेस को पैसों की मदद दे रहे हैं। इसके क्या परिणाम होंगे यह तो आप भी सोच सकते हैं। ‘‘अर्थस्य पुरुषो दासः’’ का सूत्र यहां भी लागू दिखाई पड़ता है।
काँग्रेस के कितने सदस्य पार्लिमेंट में भाषण करते हैं यह उनसे पूछिए। बोरकर अगर यहां होते तो मैं उनसे पूछता कि आप क्या करने वाले हैं? वह क्या कर सकते हैं? क्या वह कानून जानते हैं? भत्ते में मिलने वाले 30 रुपए पाने के लिए वे बस से जा रहे हैं। इससे आगे वे क्या जानते हैं? पार्लिमेंट के काम के लिए पूनमचंद जी कितने लायक हैं मैं नहीं जानता। काँग्रेस को लगता है कि लोगों का काँग्रेस पर विश्वास है। लेकिन हमारे नाम से किसी भी आदमी को वोट दीजिए कहना क्या विश्वासघात करना नहीं है? काँग्रेस के लोग इतने बेशरम हो गए हैं कि धिक्कार है उन काँग्रेसियों का। हम अक्सर बोर्ड देखते हैं जिनमें लिखा होता है ‘चोरों से सावधान!’ मैं आपसे कहता हूं कि काँग्रेस से सावधान हो जाइए। क्योंकि, वह चोर है।
अस्पृश्य वर्ग के मतदाताओं पर मेरा पूरा विश्वास है। आपको किसी प्रकार की घूसखोरी के शिकार नहीं होना चाहिए। अपने वोट को एक अमूल्य चीज मानिए। आप निम्न जात के? ध्यान में रखें कि हमारे पास कोई अधिकार नहीं हैं। ब्राह्मणों की तरह धार्मिक सामर्थ्य भी अपने पास नहीं है। इसीलिए हमारा वोट राजनीतिक क्षेत्र की हमारी एक अनमोल चीज है। उसे बेचिए मत। हम अल्पसंख्यक हैं। इसलिए अगर एक-एक दाना चुन कर भरें तभी हमारी बोरी भरेगी। जिसे मतदान का अधिकार प्राप्त है उसे अवश्य मतदान करना चाहिए। तभी मैं जीतूंगा।
मैं आरक्षित जगह परखड़ा हूं। हालांकि, जिन स्पृश्यों को लगता है कि मेरी नीतियां