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केवल अस्पृश्यों के हित में न होकर देश के हित में हैं वे भी मुझे अपना वोट दें। जरुरी नहीं कि मैं उनसे यह कहूं।
मुझसे पूछा जाता है कि दूसरे मत का क्या करेंगे? उसके बारे में बताना जरुरी है। हम काँग्रेस का विरोध करते हैं। इसलिए काँग्रेस के फायदे में जाए ऐसी कोई बात हमें नहीं करनी चाहिए। इसलिए अगर आप मेरे साथ और मैं दोनों अपने ही हैं को भी अपना वोट देंगे तो मेरा डिपॉजिट जब्त होगा। अगर आपको लगता है कि मैं जीतूं तो आपको बोरकर को अपना वोट बिल्कुल नहीं देना चाहिए। फिर दो लोग बचते हैं आयु. राका और आयु. मेहता।
मैं समाजवादी पार्टी से नाराज हूं। उनके काम में कोई अनुशासन नहीं। मुझे उम्मीद थी कि देश की अन्य पार्टियों की तरह वे उसूलों की बुनियाद पर अपनी पार्टी का संगठन करेंगे। इसीलिए पिछले चुनावों में मैंने उनकी मदद की। लेकिन इस कारण हमारा बहुत अधिक नुकसान हुआ है। हमारे लोगों ने वोट दिया इसीलिए उनके उम्मीदवार जीत पाए। लेकिन इस पर धन्यवाद का एक शब्द भी उन्होंने हमें दिया नहीं। इसीलिए मुझे उनके बारे में न तो बुरा लगता है और न ही आदर महसूस होता है। त्रावणकोर-कोचिन में वे कम्युनिस्टों के साथ उनकी बराबरी में कंधे से कंधा लगाकर लड़े और चुनावों के बाद उन्होंने पगड़ी घुमा कर बताया कि तुम्हारा और हमारा कोई ताल्लुक नहीं। उन्हें बस मंत्रीपद पाने की जल्दी मची है।
सुचेता कृपलानी ने मुझेखत लिख कर विनति की है कि अशोक का समर्थन करूं। अशोक मेहता का भीखत आया है इसलिए और अशोक, यह रांका से अधिक राजनीति में सधे हुए हैं और विद्वान हैं इसलिए उन्हें अपना दूसरा वोट दें। इसलिए नहीं कि वे सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार हैं, बल्कि इसलिए कि वे अशोक हैं इसलिए आप उन्हें अपना वोट दें।
काँग्रेस के खिलाफखड़े उम्मीदवारों को आप बहुमत से जिताएंगे ऐसी मैं उम्मीद करता हूं।
इसके बाद आयु. राजभोज ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उसके बाद धीरे-धीरे सभा का विसर्जन हुआ।
इस सभा में बहुत लोग इकठ्ठा हुए थे। गर्मी का मौसम था तो लोग प्यास से बेचैन थे। पानी के लिए होटल में लोगों की भीड लगी तो होटल मालिक ने पानी के एक गिलास की कीमत दो आने कर दी। इसके बावजूद लोगों की भीड़ बढ़ रही थी। होटल की खाने की चीजें भी फटाफट बिकीं और होटल मालिक को उनकी अधिक कीमत मिली। ख्1,
- जनताः 1 मई, 1954