338 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
वाला कोई दूसरा मजबूत दल नहीं है। स्थितियां अगर ऐसी ही रहीं तो यहां जर्मनी की तरह हिटलरशाही अथवा रशिया की स्टैलिनशाही आकर रहेगी। इसलिए हमारे अल्पसंख्यक होने के बावजूद विरोध की अग्नि प्रज्वलित रखेंगे। इस काम में दूसरों का सहयोग मिले चाहे न मिले। कभी न कभी हमारी भावना, कार्यशक्ति आदि का अन्यों पर असर होगा और वे हमारी बात मानेंगे। किसी दीपमाला के सभी दीयों के बुझ जाने के बाद भी एकाध दीया जलता रहे और सबका मार्गदर्शन करता रहे उसी तरह हमारी पार्टी छोटी होने के बावजूद अन्य सभी पार्टियों का मार्गदर्शन करेगी।
इलेक्शन मानो क्रिकेट का मैच है। क्रिकेट में हारी टीम कोने में चुपचाप नहीं बैठती। दूसरे साल वह फिर नए जोश के साथ मैदान में उतरती है उसी प्रकार का आशावाद हमें भी रखना होगा। दो साल पहले लखनऊ में भाषण देते हुए मैंने कहा था, काँग्रेस जलता हुआ घर है। इसका आप लोगों को अब तक अहसास हो चुका होगा। अब इस घर की छत बस नेहरू के रूप में बची है। कुछ ही दिनों में वह भी जल जाएगी। अपने पास आर्थिक बल नहीं है। केवल राजनीतिक सामर्थ्य है। शरण जाना मनुष्य को शोभा नहीं देता। बुरे समय में भले मनुष्य किसी की शरण जाए लेकिन समय फिरते ही वह फिर से हाथ में तलवार लेकर वार करने के लिएखड़ा होता है। हमारा हाल 1952 के चुनावों की तरह फिर नहीं होगा। मनुष्य भले कितना भी दीर्घायु क्यों न हो उसके ढलने के दिन कभी न कभी आते ही हैं। लेकिन उसके बाद हमारा उत्कर्ष ही होगा। इसलिए मैं हमेशा जोर देकर कहता रहता हूं कि संगठन को मजबूत रखो।