237 17-2-1946 सिर पर कफन बांध कर हम युद्धभूमि में उतरे हैं - रमाबाई अम्बेडकर नगर (मुंबई) - Page 37

18 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा जमीन-आसमान गूंज उठा। डॉ. बाबासाहेब बोलने के लिए उठे तब भी तालियों की गूंज थमने का नाम नहीं ले रही थी। धीरे-धीरे शांति हुई और डॉ. बाबासाहेब बोलने लगे। उन्होंने कहा-

आनेवाले मार्च महीने की 11 तारीख को मुंबई एसेंब्ली के जो चुनाव होने जा रहे हैं तब आपका क्या कर्तव्य होगा यह बताने के लिए आज इस सभा का आयोजन किया गया है। पिछले दो दिनों में मैंने खाने-पीने की फिकर किए बगैर 200 मील की यात्रा की, इसलिए मैं बहुत थक गया हूं। इसलिए आज मैं आपके सामने थोड़ा ही बोलने वाला हूं। इस बारे में आप बुरा न मानें।

अब ये जो चुनाव होने जा रहे है, उनके बारे में आप बिल्कुल निराश न हों। यह एक संग्राम है। यह हमारी आजादी का आखरी संग्राम है। कुरुक्षेत्र पर कौरव-पांडवों के बीच हुए युद्ध की तरह ही हमारी आज की यह लड़ाई है।

महाभारत में कहा है कि कौरव-पांडवों की सेनाएं जब युद्धक्षेत्र में आमने-सामने हुईं तब अर्जुन अजीब पशोपेश में था। लड़ाई कैसे की जाए? कौनसा पेंच लड़ाया जाए? विरोधी पक्ष पर हमला कैसे करें? -आदि विषयों के बारे में सोचने के बजाय आत्मा यानी क्या? आदि विषयों के बारे में अर्जुन श्रीकृष्ण से सवाल पूछ रहा था! युद्ध के क्षेत्र में इस प्रकार के सवाल पूछना मूर्खता है! मुझे शक है कि इस प्रकार का कोई प्रसंग घटित भी हुआ हो! भगव०ीता में श्रीकृष्ण द्वारा कहा हुआ ‘संग्राम समय का’ कह कर जो बार-बार इसी विषय का वर्णन किया गया है वैसा अगर आज के युग में कोई करना चाहे तो उसे मूर्खों में ही गिना जाएगा।

पिछले बीस सालों में, मैं आपको अपने उद्देश्य और उद्देश्य को साध्य करने के मार्ग के बारे में बताता रहा हूं। मुझे यकीन है कि उसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए आप पूरी तरह संगठित हुए हैं। आज मैं पिछला पाठ बिना दोहराए, आने वाली 11 तारीख को हमारा क्या कर्तव्य होगा इस विषय को केंद्रित कर बोलने वाला हूं।

पिछले चुनावों के समय प्रतिपक्ष से हमारा आमने-सामने सामना नहीं हुआ था। जितने हम आज संगठित हैं उतने तब हम संगठित भी नहीं थे, लेकिन आज हमारी शक्ति बहुत बढ़ गई है। यह देव कर दुश्मन के होश उड़ने लगे हैं। हाल ही में मुंबई में हुए हमारे प्राथमिक चुनावों के दौरान काँग्रेस के लोगों ने अपने वीर चोखाजी गांगुर्डे की हत्या की। मुझे पता चला है कि शहीद चोखाजी गांगुर्डे के शरीर पर दुश्मन द्वारा धारदार हथियारों से किए गए जख्मों के 21 निशान थे इसी शहीद की शवयात्रा में शामिल हुई भारी भीड़ पर पुलिस ने लाठियां चलाईं और उसमें हमारा दूसरा वीर रामचंद्र कांबले शहीद हुआ। कइयों को गंभीर चोटें आईं। नागपूर में हमारे गजभिए और वासनिक इन दो वीरों की बलि चढ़ी। कुछ दिन पूर्व सातारा में भी हमारी सभा पर काँग्रेस के लोगों ने पत्थर फेंके। सौभाग्य से हमारे लोग घायल नहीं हुए और उनके लोग लहूलुहान हुए!