342 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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आपके बनाए विहार में बुद्ध की प्रतिमा की स्थापना कीजिए
पुणे जिले के देहू रोड इलाके में संत चोखोबाराय और बुद्ध वाचनालय बनाया जा रहा है। इस विहार के लिए आज तक कुल 1200 रु. इकठ्ठे हुए हैं। इस रकम में विहार का कलश और आधे से अधिक कामकाज होना है। इस विहार में मूर्ति की स्थापना करने के लिए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर लोणावला आए थे। उस वक्त मंदिर के कुछ सदस्यों ने उनसे मुलाकात की। इस अवसर पर डॉ. बाबासाहब बने बौद्ध धर्म के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बौद्ध धर्म के प्रसार की बेहद जरूरत है यह लोगों को समझाते हुए कहा-
आपने चोखोबाराय का मंदिर बनाया है। उन चोखोबा की जो अपने जीवनकाल में कुछ कर नहीं पाए थे, जिनका रूप आपमें से किसी ने देखा नहीं है। ऐसे चोखोबा के बारे में आस्था रखना हित में नहीं है। इसलिए हम अब जिस भावना से प्रेरित हुए हैं उस भावना को आज के युग में पैरों तले रौंद नहीं सकते।
अपने कार्य का एक हिस्सा अगर मैं इस बात के लिए रखता तो इस बात के लिए लोगों में आदर पैदा होता और मेरे उद्देश्य की बातें दुनिया भर में फैलती। लेकिन मेरे साथ कई काम जुडे हुए हैं सो मैं इस काम के लिए थोड़ा समय भी नहीं दे पाया।
धर्म, प्रचलित रूढि़यों की शिकार दलित जनता अंधविश्वास के कारण अधोगति को प्राप्त हुई है। हिंदू धर्म के तैंतीस करोड़ देवताओं की पूजा करते हुए हजारों बारिश उन्होंने झेलीं। धर्म के प्रति गर्व के कारण आज तक यह भोली जनता उसी बात का पालन करती आई है। लेकिन सत्य, अहिंसा, परोपकार के त्रिवेणी संगम का झरना बहाने वाली नदी पर शंकराचार्य ने बांध बनाया। और आज वही नदी समंदर बन गई है। उस समंदर में कुछ अंधभक्त लोग पूजनीय भावना मन में लिए स्नान कर अपने पापों का क्षालन कर रहे हैं। जिस धर्म में इंसानियत नहीं उस धर्म के भगवान के बारे में भी अपनापन महसूस होना ठीक नहीं। इसीलिए अबसे आगे हमें अलग भाव से या उद्देश्य से अगले कार्य की रूपरेखा बनानी होगी। इसीलिए मुझे आपको यह सलाह देने का मन हो रहा है कि आपके बनाए मंदिर में आप बुद्ध की मूर्ति की स्थापना कीजिए।
आखिर विहार समिति द्वारा मूर्ति की स्थापना डॉ. बाबासाहेब के ही हाथों करने की इच्छा उनके सामने प्रकट की। तब मूर्ति की स्थापना के लिए उपस्थित रहने का आश्वासन उन्होंने दिया। साथ ही अपने मित्र से बुद्ध मूर्ति दिलाने का भी वचन दिया।
जनताः 8 मई, 1954। जनता के अंक में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की मुलाकात की तारीख नहीं दर्शायी है - संपादक