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समाज को गुमराह करनेवाले नेताओं पर कड़ी नजर रखना जरुरी है

1 जुलाई, 1954 को मुंबई के कामा हॉल में मुंबई प्रदेश शेड्यूल्ड क्लास फेडरेशन के सभी वार्ड कमेटियों की बैठक में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने उन्होंने कहा,

बहनों, और भाइयों,

वैसे देखा जाए मेरा यहां कोई स्थान है, ऐसा मुझे नहीं लगता क्योंकि, मैं यहां किसी वार्ड मेंबर की हैसियत से नहीं आया हूं। आगामी हीरक महोत्सव के लिए आपने कितना पैसा इकठ्ठा किया है और करने जा रहे हैं यह देखने के लिए मैं आया हूं। मैंने यह भी देखा है कि कई शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन शाखाओं के कार्यकर्ताओं ने आज तक पैसा इकठ्ठा किया, बिल बुक्स ले जाकर पैसा उगाहा लेकिन सही अधिकारी के पास पैसा पहुंचाया ही नहीं। किसके पास कितना पैसा है और उसका व्यय किस प्रकार किया जा रहा है इसका कोई हिसाब नहीं है। इसलिए मुझे लगता है कि इन बातों के बारे में पहले जानकारी होनी चाहिए।

आज पहाड़ों में भी चींटियां छेद कर रही हैं और आगे भी करती रहेंगी इसका आप लोगों को अहसास नहीं है। आज आपका ये हाल है, आगे आपका क्या होगा? आपका भविष्य क्या है? अपना भविष्य क्या है, यह आप लोग जानते नहीं हैं। आपके भविष्य के बारे में मुझे थोड़ा अंदाजा है, लेकिन आज मैं उस बारे में बोलने वाला नहीं हूं। कोई ऐसा दिन आएगा जब मैं आप सब लोगों को इकठ्ठा कर आगे क्या होने वाला है और उसके लिए क्या किया जाना चाहिए इसके बारे में विस्तार में बताऊंगा। कम से कम आज मैं इस बारे में कुछ बोलना नहीं चाहता। हालांकि, अपने भविष्य की ओर आप ध्यान दें।

अपने सार्वजनिक कार्य के लिए ऐसे किसी हॉल की जरूरत है, जिसके किराए से हमारा थोड़ा-बहुत सार्वजनिकखर्च पूरा होता रहेगा। इस मद में पैसों की बेहद जरूरत है। आपने 87 हजार रुपये जोड़े लेकिन मैंने एक लाख से अधिक इकठ्ठा किए हैं। अभी हमें 25 हजार और रुपयों की जरूरत है। यह रकम जोड़ने के लिए आप जगह-जगह चाल कमेटियों की स्थापना कीजिए। जिन पर रसीद बुक या उससे मिले पैसे बाकी हों उनसे मिल कर, उनके पीछे पड़ कर उनसे सार्वजनिक कार्य का पैसा उगाहें और सही व्यक्ति के पास वह पैसा पहुंचा दें। सार्वजनिक काम करते हुए, पैसा लेते या देते हुए इस बात काखयाल जरूर रखें कि कहीं कोई हमारे साथ धोखा तो नहीं कर रहा? इस तरह

3 जुलाई, 1954