344 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
का पैसा उगाहने और उसे सही जगह पहुंचाने को आप अपना कर्तव्य मानिए। क्योंकि आजकल समाज का पैसाखा जाने का चलन बहुत बढ़ा है और कम से कम मैं इस बात से बहुत ही ऊब चुका हूं। ऐसे लोगों को समाज में से ढूंढ कर निकालना चाहिए और समाज को कौन किस तरह धोखा दे रहा है इस बात पर पैनी नजर रखनी चाहिए।
समाज के लिए काम करने वाले लोग बहुत कम होते हैं जो समाज के प्रति अपनी भी कोई जिम्मेदारी है समाज का कोई ऋण हमें लौटाना है यह जो लोग सोचते और कार्य करते वे कम ही लोग होते हैं। ऐसे काम के बारे में बहुत कम लोगों को आस लगी रहती है। सभी अगर कार्यकर्ता होते तो इमारत फंड के लिए इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ती। सामाजिक कार्य के बारे में बहुत कम लोगों को लगन होती है। अन्य सभी लोग गोबर के कीड़े की तरह अपने ही आनंद में मगन रहते हैं। इसलिए ऐसे लोगों को उनके गोबर के कीड़े की तरह जीने का अहसास दिलाने को हर सुशिक्षित आदमी अपना कर्तव्य माने।
कम से कम आज समाज के सामने ऐसी स्थितियां आनखड़ी हैं कि कोई काम कर रहा है और कोई मेवाखा रहा है।खेत की रक्षा के लिए हमने सुरक्षा का विशेष प्रबंध तो किया, लेकिन जिनके हाथ सुरक्षा का प्रबंध सौंपा आज वे ही डाके डालने लगे हैं। इसे कहें तो क्या कहें। ऐसे कठिन हालात का अहसास हर किसी को होना जरुरी है।
समाज को इस प्रकार धोखा देने वाले नेता पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। उनका षड्यंत्र समय पर ही उजागर करें और जनता को जागृत करें। उसकी सामाजिक गतिविधियों पर ध्यान रखा जाना चाहिए। संक्षेप में कहना हो तो, आज से तीन-चार महीनों के बाद हीरक महोत्सव के लिए मैं यहां दोबारा आने वाला हूं। इसलिए, इमारत फंड जितना जल्दी इकठ्ठा किया जाए उतना ही अच्छा है। इस काम में देरी करने का कोई मतलब मुझे नजर नहीं आ रहा। इसीलिए कहता हूं कि जगह-जगह चाल कमेटियां बना कर उनके जरिए पैसा इकठ्ठा कीजिए। जिनके पास इकठ्ठे किए हुए पैसे और रसीद बची हों उनसे वे सब ले आइए। मैं आपके साथ हूं ही।