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आपकी कुटिया बचेगी तो लोग शरण में आएंगे
1954 में 26-27 अक्तूबर, को मुंबई प्रदेश अखिल भारतीय शेड्यूल्ड कास्टस् फेडश्रेष्ठान का अधिवेशन मुंबई के पुरंदरे स्डेडियम पर आयोजित किया गया था। अधिवेशन के पहले ही दिन डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अधिवेशन में उपस्थित रह कर कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। उसी दिन आयु. आर. डी. भंडारे ने डॉ. बाबासाहेब की अनुमति से ‘शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन की कार्यकारिणी और शाखाओं का विसर्जन कर नए चुनाव लिए जाएं’ यह प्रस्ताव रखा और उस प्रस्ताव का पुणे के आयु. आर. आर. भोले ने समर्थन किया। तालियों की गड़गड़ाहट में यह प्रस्ताव भारी बहुमत से पारित हुआ। इस प्रस्ताव के कारण फेडरेशन के कार्यकर्ताओं का गुस्सा कुछ हद तक कम हुआ इसमें दो राय नहीं। परिषद के विद्यमान पदाधिकारियों की नियुक्ति 1945 में हुई थी। तब से वे अपने पद पर कुंडली मार कर बैठे थे, जिस कारण अन्य कार्यकर्ताओं में बेचैनी फैली हुई थी। छह माह के भीतर नए चुनाव होने वाले हैं।
पहले दिन यानी 26 अक्तूबर, 1954 को परिषद का मार्गदर्शन करते हुए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा-
मित्रों,
जिस कारण से इस सभा का आयोजन किया जाना था, वह बात शायद इस सभा के व्यवस्थापकों को समझ नहीं आयी। अगर वे समझते तो आज जो यह सभाखुले में होने के बजाय कहीं गुप्त स्थान पर इसका आयोजन वे करते। मैं कार्यकर्ताओं को कई बातें बताना चाहता हूं लेकिन वे गुप्त तरीके से बताना चाहता हूं। अब जो मुझे कहना है वह मैं साफ तौर से नहीं कहूंगा। उसका केवल अभिप्राय ही बताऊंगा। शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन में जो गंदगी मची है उसे उघाड़ने का मेरा मन था। महापालिका की नालियां जब भर जाती हैं उसी प्रकार शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन में गंदगी मची हुई है। गुप्त तरीके से इस गंदगी को हटाना चाहिए था। शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन की राजनीति को 1919 से शुरुआत हुई। उससे पहले भी अस्पृश्य आंदोलन का काम चल रहा था। यह कोई आज-कल की संस्था नहीं है। यह काँग्रेस जितनी ही नहीं, उससे भी पुरानी संस्था है। कहा जा सकता है कि गांधीजी से काँग्रेस की शुरुआत हुई। साल भी 1919 ही था। दुर्भाग्य की बात यह थी कि उसी साल से हमें काँग्रेस का विरोध करना पड़ा है। तब
जनताः 6 नवंबर, 1954