324 28-10-1954 तीन गुरु और तीन उपास्य आदर्शों की कृपा से मेरा जीवन बना है - मुंबई - Page 368

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तीन गुरु और तीन उपास्य आदर्शों की प्रेरणा से मेरा जीवन बना है

गुरुवार, दिनांक 28 अक्तूबर, 1954 को डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को उनके हीरक महोत्सव के उपलक्ष्य में मुंबई के पुरंदरे स्टेडियम में आयोजित भव्य, अपूर्व समारोह में 1लाख 18 हजार रुपयों की थैली अर्पण की गई। यह सारा पैसा डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर अपने स्वास्थ्य के लिएखर्च करें यह विनती हीरक महोत्सव समिति के सचिव आयु. शां. अ. उपशाम और आयु. आर. डी. भंडारे ने किया। उनकी इस विनति का सभा में उपस्थित 30 हजार दर्शकों ने तालियों के साथ स्वागत किया। लेकिन, ‘‘अपना पसीना बहा कर, मेहनत से कमाया हुआ गरीब जनता का पैसा मेरे जैसे बैरिस्टर को स्वीकारना बेशर्मी है’’, कह कर डॉ. बाबासाहेब ने वह सारी राशि मुंबई में बनाई जा रही इमारत के फंड में देने की घोषणा कर दी।

अभूतपूर्ण स्वागत

एक-सौ पचास से भी अधिक संस्थाओं की ओर से डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को फूलमालाएं और गुलदस्ते अर्पण किए गए। उनके साथ माईसाहब अम्बेडकर भी थीं। अध्यक्ष थे आयु. आर. डी. भंडारे सिद्धार्थ कॉलेज के प्रिंसिपाल आयु. पाटणकर, प्रो. वी. जी. राव, रा. ब. बोले, आयु. दादासाहब गायकवाड़, आयु. आर. आर. भोले, ‘जनता’ के संपादक आयु. यशवंतराव आंबेडकर, प्रो. बोराले, आयु. अनंत हरी गद्रे, आयु. ब. ह. वराले, आयु. डी. जी. जाधव, शांताबाई दाणी आदि लोग वहां उपस्थित थे।

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अपने भाषण में कहा-

बहनों और भाइयों,

आपने जो यह एक लाख अठ्ठारह हजार रुपयों की राशि दी है, वह बहुत ही हल्की है। (हंसी) मुझे थोड़ा शक हुआ। इसलिए यह इतनी बडी राशि की घोषणा मैनेजिंग ट्रस्टी ने की है इसीलिए उसकी जिम्मेदारी मैं उन्हीं को सौंपता हूं।

सच पूछो तो मेरा हीरक महोत्सव मना कर उसी के उपलक्ष्य में यह राशि दी गई है ऐसा अभी-अभी बताया गया है। हीरक महोत्सव केवल निमित्त हुआ है। ये पैसे आपके ही हैं और एक हॉल बनाने के लिए जमा किए गए हैं। उसे मूर्त रूप देने के लिए केवल मैंने सूचना दी थी कि वे मुझे अपनी उम्र के साठवें साल में दिए जाएं। कई साल पहले

जनता, 6 नवंबर, 1954