324 28-10-1954 तीन गुरु और तीन उपास्य आदर्शों की कृपा से मेरा जीवन बना है - मुंबई - Page 369

350 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इस फंड को इकट्ठा करने की शुरुआत हुई थी। 1942 में मेरी एक्जीक्यूटीव कौंसिल में नियुक्ति हुई तो मुझे मुंबई छोड़ कर जाना पड़ा। उस समय रुपया इकट्ठा करने के काम में थोड़ी सुस्ती आ गई थी। 1952 में लौटने के बाद एक बार फिर मैंने वह काम हाथ में लिया। लेकिन दुर्भाग्य से इमारत के लिए जो जगहखरीदी थी उसमें किराएदार रखे जाने के कारण इमारत का काम शुरू नहीं किया जा पा रहा था। किराएदारों को निकालना मुश्किल हो गया था। बताने में अब कोई हर्ज नहीं है कि मैंने थोड़ा पद का इस्तेमाल कर मुंबई का कानून बदलवा लिया है। उस कानून के कारण अब किराएदार निकल जाएंगे और इमारत का कामकाज शुरू किया जा सकेगा। मैंने जो किया वह जनता के लिए किया और यह राशि जो इकठ्ठा हुई है वह भी आपकी ही है। अपने समाज के इन गरीब महिला और पुरुषों ने पसीना बहाकर कमाए हुए, उनकी मेहनत के ये पैसे हैं। और मैं बैरिस्टर हूं। एक्जीक्यूटिव कौंसिल का सदस्य था। स्वास्थ्य के कारण गरीब जनता का पैसा लेना बेशर्मी होगी। इसलिए यह सारा पैसा, जैसा कि मैंने पहले ही बताया है, इमारत बनाने के काम मेंखर्च होगा। मैं यहां घोषणा करता हूं कि मुझे इसमें से एक पैसा भी नहीं चाहिए। (तालियों का घोष)

मित्रों, आज यहां बैठा हूं तो मेरे जीवन में अब तक जो घटनाएं घटी हैं वे सभी फिल्म की तरह आंखों के सामने आकरखड़ी हैं। मैं कहां पैदा हुआ, मेरे पिताजी मुझे कहां-कहां लेकर गए, मेरे साथ क्या-क्या हुआ यह सब कुछ मेरी आंखों के आगेखड़ा हुआ है। लेकिन मुझे यहां एक बात बतानी है और वह यह कि मेरी उम्र के 60 साल पूरे हुए इसका क्या सबूत है? (हंसी) मैं किस साल पैदा हुआ इसका कोई रिकार्ड नहीं है। क्योंकि मेरे पिताजी सिक्स पायोनियर बटालियन में थे। बाद में वे सेवन पायोनियर बटालियन में गए। तब उन्हें मेरा अपने बेटे के रूप में कोई महत्व महसूस नहीं हुआ था। उन्होंने मेरे पैदा होने की तारीख लिख कर नहीं रखी। कितनी छोटी बात है ये। लेकिन वे नहीं कर पाए। आज जो पैदा होने की तारीख है वही सच है ऐसा कोई कह नहीं सकता।

हालांकि मेरे बारे में दो-तीन बातें साफ तौर पर कही जा सकती हैं। राजपूताने में महू में मेरा जन्म हुआ। इसलिए मेरा कोकण के साथ कोई रिश्ता नहीं रहा। पिताजी कोंकण के ही हैं। लेकिन नौकरी के कारण उन्हें राजपूताने में जाना पड़ा। इस कारण मेरा जन्म महू में हुआ यह बात पक्की है। दूसरी बात कि मेरा जन्म ठीक बारह बजे हुआ। उस वक्त मेरे पिताजी नौकरी पर थे और मेरी मां की जच्चगी चल रही थी। मेरा पिंड बहुत बड़ा था। कहते हैं मेरे पैदा होते समय मेरी मां को बहुत तकलीफ हुई। मेरे पिताजी को चिंता थी। लेकिन आखिर एक दाई ने आकर उनसे कहा कि, अंदर जाओ, बेटा हुआ है।

तीसरी बात यह कि, मैं मूल नक्षत्र में पैदा हुआ था। ज्योतिषि ने बताया कि यह बच्चा बहुत बुरा है। इसकी मां जल्दी मरेगी। इस कारण अन्य भाई-बहन मुझसे नफरत