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पिछले चुनावों के समय काँग्रेस ने कोई बखेडा खड़ा नहीं किया। खुले आम हमसे टक्कर लेने का साहस उसने उस वक्त नहीं दिखाया। फिर ऐसा क्या हुआ कि काँग्रेस आज ही हमसे लड़ रही है? हम इस बात को अच्छी तरह जान लें।
हम राजनीति के मैदान में उतरे हैं, इसलिए या हम चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए काँग्रेस का हम स्वाभिमानी अस्पृश्यों पर गुस्सा है ऐसी बात नहीं। असल में वह हमारा फेडरेशन ही नहीं चाहते। शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन का कांटा उनकी आंवों में चुभ रहा है। अपने फेडरेशन की बढ़ती ताकत से काँग्रेस वाले बौखला गए हैं।
काँग्रेस को लगता है कि अस्पृश्य लोग और मुसलमान अलग-अलग रहकर ही चुनाव लड़ें, उनका समाज बिखरा रहे तो बेहतर है। इस प्रकार बिखरे हुए लोगों को काँग्रेस में
खींचने की उनकी कवायद चलती रहती है। कुत्ते के सामने हड्डी डालने से वह भौंकता नहीं। इसी तरह निर्दलीय चुनाव लड़ने वालों को वश करना काँग्रेस के लिए आसान होता है। किसी को जूतों की फैक्ट्री का, किसी को गटर बनाने का काँट्रॅक्ट देकर उसे उपकृत किया जा सकता है। उल्टे किसी ताकतवर संस्था के उम्मीदवार को किसी भी तरह का लालच देकर अपने वश में नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि काँग्रेस नहीं चाहती कि हमारी शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन ज्यादा ताकतवर बने।
काँग्रेस के नेताओं के नजरिए को अगर अच्छी तरह जांचा-परखा जाए तो समझ में आएगा कि कांग्रेस यही चाहती है कि केवल एक संस्था रहे, वह केवल कांग्रेस। उनकी महत्वकांक्षा है कि अन्य सभी लोग चुपचाप काँग्रेस में ही शामिल हों। एक संस्था, एक नेता और एक ही मार्ग हासिल कर अन्य पूरे समाज पर निर्बाध रूप से सत्ता चलाने की काँग्रेसीजनों की इच्छा है और अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए वे जबरदस्त मेहनत कर रहे हैं। हमें मार गिराने के लिए वे किसी भी मार्ग का सहारा ले रहे हैं। हाल ही में हमारे लोगों पर जो हमले हुए हैं, हमले हो रहे हैं, हमारे शूर वीरों की जो हत्याएं हुई हैं उसका कारण है काँग्रेस की यही शैतानी महत्वकांक्षा!
मैं आपसे यही कहना चाहता हूं कि विरोधी पार्टी की किसी भी गुंडागर्दी से आप डरें नहीं। आपके उद्देश्य और उद्देश्य के प्रति आपके प्रेम को लेकर मैं पूरी तरह आश्वस्त हूं। 11 मार्च को होने वाले चुनावों में अपने उम्मीदवार को भारी बहुमत से विजय दिलाने की आप पूरी-पूरी कोशिश करें। किसी की भी धमकियों से आप न डरें।
शहीद गांगुर्डे अच्छे कार्यकर्ता थे। हमारे अन्य सभी शहीद भी अच्छे कार्यकर्ता थे। उन सभी के परिवारों से मैं यह कहना चाहता हूं कि वे उनकी मृत्यु पर शोक न करें। आज या कल लेकिन निश्चित रूप से हर किसी के साथ घटने वाली घटना है मृत्यु। शहीद गांगुर्डे और अन्य शहीदों को वीरगति प्राप्त हुई। उनकी मृत्यु से समूचा समाज दुखी हुआ। ये वीर शहीद मरे नहीं, वे अमर हुए हैं! उनकी मृत्यु अनुपम है।