325 14-11-1954 राष्ट्र की सैनिकी सुरक्षा के लिए जरूरी है कि हैदराबाद देश की उप-राजधानी बने - हैदराबाद - Page 375

356 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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राष्ट्र की सुरक्षा के लिए जरुरी है हैदराबाद देश की

सद्र-राजधानी बने

14 नवंबर, 1954 के दिन दोपहर 12.15 बजे डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर और आयुष्मती माईसाहब अम्बेडकर का हैदराबाद के बेगमपेट हवाई अड्डे पर आगमन हुआ। उनके स्वागत के लिए सिकंदराबाद शे. का. फे. के अध्यक्ष आयु. यादगीरवार, मराठवाड़ा शे. का. फे. के सह सचिव आयु. वी. एल. सुरवसे, बीड़ जिला शे. का. फे. के अध्यक्ष आयु. वी. जे. आरक, औरंगाबाद जिला शे. का. फे. के. सहसचिव आयु. ए. एम. सालवे, औरंगाबाद कॉलेज के रजिस्ट्रार आयु. बी. एच. वराले, हैदराबाद राज्य के अर्थमंत्री श्री विनायकराव विद्यालंकार आदि सज्जन उपस्थित थे।

शुरुआत में शे. का. ट्र. फं. होस्टेल के छात्र-छात्राओं ने और दिवंगत व्यंकटराव होस्टेल के छात्रों ने डॉ. बाबासाहेब और माईसाहब को फूलमालाएं अर्पण कीं। उपस्थित जनसमुदाय ने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की जयश्, अम्बेडकर जिंदाबादश्ए शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन की जय हो, की घोषणाएं दीं। बाद में उन्हें परसियस होटल ले जाया गया।

उसके बाद वे मराठवाड़ा साहित्य परिषद और मराठी ग्रंथ संग्रहालय संस्थाओं में गए। इन दोनों संस्थाओं के प्रमुख द्वार पर उनका स्वागत-सत्कार किया गया। करीब डेढ़ घंटे तक उन्होंने विभिन्न विषयों पर चर्चा की।

भाषाओं के आधार से प्रांत बनाना विषय पर उन्होंने कहा-

भारत के सभी भाषाई प्रांतों में अगर सबसे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण प्रांत कोई होगा तो वह है महाराष्ट्र। महाराष्ट्र अन्य सभी प्रांतों से ठगा गया। सबने महाराष्ट्रीयन का जमकर दमन किया। महाराष्ट्र पर गुजराती-मारवाडि़यों की निर्बाध वर्चस्व है। तो हैदराबाद में मराठवाड़ा पर तेलुगु लोगों का वर्चस्व है। बरहाड़ तो हिंदी भाषियों को अपना उपनिवेश लगता है। इसके पीछे वजह है महाराष्ट्रियों का कमजोर होना। उनमें अब कोई जान नहीं बची है। आते-जाते दिल्ली जीतने की वे केवल गप्प ही हांकते रहते हैं। 50-60 रुपयों की क्लर्की के बगैर वे और कुछ नहीं कर सकते। महाराष्ट्र की परंपरा अच्छी है लेकिन केवल दिव्य परंपरा होने से क्या हासिल हुआ। हमारे तथाकथित नेता मर्दानगी की बातें बहुत करते हैं लेकिन उनमें से कोई भी महाराष्ट्र की उन्नति के लिए त्याग करने के लिए

जनताः 27 नवंबर, 1954