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यहां श्रोताओं से एक ने पूछा कि रूस में 40 सालों से तानाशाही बरकरार रही है, उसका शिकंजा अधिकाधिक मजबूत होता गया है। उसी प्रकार क्या वह भारत में भी हमेशा के लिए कायम नहीं होगी? इस सवाल पर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा-
जखिम तो है। लेकिन बताइए कि जोखिम कहां नहीं है? हमारा लोकतंत्र क्या जखिम से मुक्त हैघ् रूस में आज भी तानाशाही का होना मुझे ठीक नहीं लगता। इस दीर्घ कालावधि का उपयोग कर रशिया को असल में असली प्रजातंत्र और व्यक्ति की आजादी को स्थापित करना चाहिए था। लेकिन वहां ऐसा नहीं हुआ। तानाशाही में यह जखिम होता है यह मैं मानता हूं लेकिन प्रजातंत्र के लिए जरूरी जागरूकता और परंपरा हमारे यहां हैं कहां? अंधविश्वास रुढ़ीवादिता आदि दोषों के कारण आज हमारा समाज अंधा बन गया है।
कुंभ के मेले में नंगे साधुओं के पैरों तले कुचल कर हजारों नागरिक मर गए धर्म के प्रति इतना अंधविश्वास और पागलपन विश्व में किसी देश में हमें दिखाई नहीं देगा। यह घटना क्या दर्शाती है? मैं अगर मंत्री होता और अगर अधिकार होते तो मैं उन साधुओं को सेना भेज कर भगा देता। जरूरत पड़ने पर गोलियां भी बरसाता। पहाड़ों पर रहने वाले साधुओं को अगर लोगों के बीच आना हो तो उन्हें कपडे पहन कर ढंग से आना चाहिए। लेकिन हमारे शासकों ने ऐसे समय क्या किया? लोगों के अंधविश्वास को धार्मिक लोकप्रियता के लिए उन्होंने बस भुनाया।