360 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
326
अधूरी शिक्षा काम की नहीं
अपनी हैदराबाद यात्रा के दौरान 14 नवंबर, 1954 को डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर शाम को शेड्यूल्ड कास्टस् ट्रस्ट फंड की ओर से चलाए जाने वाले होस्टल गए थे। उनके स्वागत में होस्टल को लता-पुष्पों से सजाया गया था। होस्टल के चालक आयु. शेरसिंह ने संक्षेप में होस्टल की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
उसके बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने छात्रों के बड़े समूह के समक्ष भाषण किया।
जिन लोगों ने यह बो²डगखोला है, उनको धन्यवाद देना होगा। छात्रों को ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए जिससे कि लोग उन्हें बुरा कहें। अपने को मिले मौके का समय रहते सही उपयोग कर लेना चाहिए। मेरे समय हालात बहुत मुश्किल थे। दस बाय दस का हमारा एक कमरा थी। उसमें सामान, परिवार के दस लोग, एक बकरी और दो पैसे की एक ढिबरी थी। ऐसे हालात में मुझे पढ़ना पड़ा है। मैं बहुत पढ़ा हूं इसलिए लोग मुझसे डरते हैं। साल भर काम करने के बावजूद लोगों से जो काम हो नहीं सकता वह मैं दो मिनट में कर देता हूं (तालियां)। इसकी वजह है कि मैंखूब पढ़ा हूं। इसी प्रकार आप लोगों को भी पढ़ने की कोशिश करनी होगी। अधूरी शिक्षा किसी काम की नहीं। परीक्षा में कोई भी उत्तीर्ण हो सकता है। केवल परीक्षा में पास होकर उपाधियां हासिल करने से कोई फायदा नहीं। छात्रों को रचनात्मक कार्य करना होगा। पत्थर तोड़ने और क्लर्की करने में कोई फर्क नहीं है।
इस देश में ब्राह्मण समाज को गलतफहमी थी कि सिर्फ हम ही विद्या प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन यह सफेद झूठ है। किसी यूरोपियन ने कहा है कि दुनिया में छह विद्वान हैं। उनमें से एक हैं डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर। विद्या एक तलवार की तरह है। इस तलवार के सहारे कोई किसी की गर्दन काटता है तो कोई किसी की रक्षा करता है ।इसके लिए धर्मशील बनना चाहिए। हर रोज सुबह-शाम सामूदायिक वंदना कर बौद्ध तत्व का पालन करना होगा। हर हफते चर्चा के विषय तय कर उन पर बोलने वाले किसी विद्वान को बुलाकर उनका व्याख्यान सुनना चाहिए। दुनिया में कैसे जीना चाहिए यह आपको सिखाया जा रहा है। इसलिए छुट्टियों में घर जाने के बाद स्वास्थ्य और सफाई के बारे में अपने माता-पिताओं को बता कर उनमें सुधार लाने की आपको कोशिश करनी होगी। आपके बो²डग को फिलहाल जो मदद मिल रही है वह एक तालाब के पानी जैसी है। कभी ना कभी यह स्त्रोत सूख जाएगा। इसके लिए सरकार की ओर से स्थायी मदद की व्यवस्था की जानी चाहिए।
जनताः 20 नवंबर, 1954