362 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
धर्म प्रसार के काम मेंखर्च किए जाएं तो अल्पावधि में ही हम बौद्ध धर्म का भरपूर प्रसार कर सकेंगे।
भारत के बारे में बोलना हो तो मुझे बड़े दुख के साथ कहना पड़ेगा कि जिस देश में गौतम बुद्ध का जन्म हुआ, उसी देश में उसके धर्म का लोप जैसी घटना क्यों घटे? यहां उपस्थित प्रतिनिधियों के राष्ट्रों में से बहुत कम राष्ट्रों को इस बात का अहसास होगा कि भारत में ब्राह्मणों ने अपने वर्चस्व को कई वर्षों तक बनाये रख। लेकिन आज मैं ब्राह्मणों को चुनौती देता हूं कि उनमें से कोई भी प्रकांड पंडित बौद्ध धर्म दर्शन के बारे में चर्चा करे। मुझे यकीन है कि उसे मैं हरा दूंगा। (तालियां)
प्राचीन समय में हिंदू धर्म में यज्ञ में गायों की बलि चढ़ाने से स्वर्ग प्राप्ति होती है, ऐसा ब्राह्मण बताया करते थे। मैंखुले आम उनसे पूछना चाहता हूं कि इस प्रकार जितनी समयावधि में स्वर्ग की प्राप्ति होती होगी, उससे भी अधिक जल्दी स्वर्ग की प्राप्ति हो सकती है, बशर्ते अपने पिता की बलि चढ़ाई जाए। फिर ये लोग क्यों अपने पिता की बलि नहीं चढ़ाते? किसी समय इस प्रकार व्यवहार करने वाले ब्राह्मण आज गोहत्या प्रतिबंध का प्रचार कर रहे हैं। गौतम बुद्ध के अहिंसा सिद्धान्त की यह सबसे बड़ी विजय थी।
ब्राह्मणों के अलावा अन्य पक्ष भारत में बहुत हैं। धर्मों के बारे में उनकी स्थितियां भी बड़ी दयनीय हो गई हैं। ब्राह्मणों ने इस देश में हजारों भगवान और देवियां निर्माण की हैं। किस भगवान की उपासना करने से किस भगवान की भक्ति करने से मोक्ष या मुक्ति मिलेगी यह उनकी समझ में भी नहीं आता। अपने बौद्ध धर्म में मोक्ष, स्वर्ग आदि मूर्ख कल्पनाओं के लिए स्थान नहीं है। अपना बौद्ध धर्म बताता है कि अगर मानवी जीवन सुख से, संतोष के साथ बिताना हो तो मानव को चाहिए कि वह आचरण शुद्ध रखे, अहिंसा, समता और बंधुत्व को धारण करें। इसके अलावा कोई दूसरा मार्ग नहीं है। इन बातों को गौतम बुद्ध के धर्म के सिद्धांत कहा जाता है और मैंने यही सिद्धांत अपने छह करोड़ अनुयायियों से कहे हैं। पैसों की कमी के कारण मैं आज उनके लिए कुछ भी कर नहीं पाया। लेकिन जब मेरे पास अल्पावधि में ही योग्य साधन उपलब्ध होंगे तब बौद्ध धर्म का प्रसार मैं भारत में जरूर करूंगा। (तालियां)
पार्लियामेंट में था तभी बौद्ध धर्म के पुनरुत्थान के लिए कुछ बातें मैंने कर दी हैं। मैं भारतीय संविधान का शिल्पकार हूं। मैंने वह संविधान बनाया है। एक बात यह कि उसमें पाली भाषा के उत्थान का प्रबंध मैंने कर रखा है, और, दूसरी बात यह कि, राष्ट्राध्यक्ष के राजवाड़े के ऊपर गौतम बुद्ध के उपदेशों में से पहला चरण -धम्मचक्र परिवर्तन- लिखा दिया है। ब्रह्मदेश के अध्यक्ष डॉ. जी. पी. मल्लशेखर के ध्यान में मैंने यह बात