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शायद जिंदा नहीं बचूंगा लेकिन यह होकर रहेगा। मुझे इस बारे में रत्ती भर का संदेह नहीं है। एक व्यक्ति कुछ लोगों को कुछ समय तक धोखे में रख सकता है। एक व्यक्ति सभी लोगों को हमेशा धोखा नहीं दे सकता।
बौद्ध धर्म को 1956 में ढ़ाई हजार साल पूरे होंगे। साढ़े बारह सौ सालों तक यह धर्म जिंदा था। इस बात को साबित करने के लिए मैं आज ऐतिहासिक सबूत देने जा रहा हूं। पुराने जमाने में इस देश पर मुसलमानों ने हमले किए। मुसलमान मूर्तिपूजक नहीं होते। उनके द्वारा बौद्ध धर्म के लोगों पर हमले हुए और यह धर्म कमजोर हुआ। अफगानिस्तान के 100 प्रतिशत लोग बौद्ध धर्मीय थे। वहां बौद्ध धर्म प्रचलित था। 7000 बौद्ध भिक्षु वहां पर थे। मुसलमानों ने उन पर आक्रमण किए तब उनके सामने दो ही उद्देश्य थे। पहला, इस देश के लोग इस्लाम को अपनाएं। दूसरा, जो इस धर्म को स्वीकार नहीं करेंगे उन्हें मौत के घाट उतारना। उन्होंने इन सात हजार भिक्षुओं का कत्ल किया।
यह धर्म जब जिंदा था तब बहुत ही लोकप्रिय था। इस देश में नालंदा विश्वविद्यालय था। ज्ञान देना इस धर्म का तत्व था। एक आचार्य और दस छात्र साथ बैठते और ब्राह्मण शास्त्र सिखाते ऐसी इस धर्म की स्थिति नहीं थी।
बौद्ध धर्मीय लोगों ने पहले विश्वविद्यालय की स्थापना की। नालंदा विश्वविद्यालय में तेरह हजार छात्र और एक हजार अध्यापक थे। ब्राह्मण धर्म एकांगी था। अनेक कारणों से उसका मुसलमानों से बचाव हुआ। बौद्ध धर्म के खिलाफ भी ब्राह्मणों की कारगुजारियां जारी थीं। इसीलिए यह धर्म अस्त हुआ।
बौद्ध धर्म पर मैं अंग्रेजी भाषा में एक किताब लिख रहा हूं। दो महीनों के बाद यह किताब प्रकाशित होगी। इस किताब को मराठी में भाषांतरित कर प्रकाशित किया जाएगा।
मेरे कुछ मित्र मुझसे पूछते हैं -आपका बौद्ध धर्म अगर इतना अच्छा था तो उसका ”ास क्यों हुआ? मैं उनसे पूछता हूं कि अगर मान लें कि यह धर्म बुरा था इसलिए इसका ”्रास हुआ तो चीन, जापान, कंबोडिया, सिलोन आदि देशों में यह धर्म क्षीण क्यों नहीं हुआ? वहां यह धर्म अभी तक टिका हुआ क्यों है? इन देशों में अगर यह धर्मखत्म नहीं हुआ तो उसे कोई दूसरा घुन लगा होगा। उसके खिलाफ साजिश रची गई होगी। बताने का मतलब यह है कि उसके उदय से लेकर वह साढ़े बारह सौ सालों तक वह चल रहा था। इतिहासकारों ने इस इतिहास को छुपा रखा है। इस बार मैं पूरे भारत के बारे में नहीं बोलने वाला हूं। मैं सिर्फ महाराष्ट्र के बारे में बोलने वाला हूं। हमारा महाराष्ट्र भी 100 प्रतिशत बौद्धधर्मीय था। सबूत के तौर पर महाराष्ट्र के पुरातनकालीन उकेरी हुई मूर्तियां के उदाहरण दिए जा सकते हैं। भारत की दो हजार मूर्तियों में से डेढ़ हजार मूर्तियां महाराष्ट्र में हैं। ये मूर्तियां जहां हैं वे ठिकाने बौद्ध भिक्षुओं के रहने की जगहें थीं। यही