330 14-1-1955 हिंदु धर्म में भगवान, आत्मा आदि की जगह है लेकिन मनुष्य के जीवन के लिए कोई स्थान नहीं - वरली (मुंबई) - Page 390

 371

330

हिंदु धर्म में भगवान, आत्मा आदि की जगह है लेकिन मनुष्य के

जीवन के लिए कोई स्थान नहीं

मुंबई की बौद्धधर्म सलाहकार समिति की ओर से दिनांक 14 जनवरी, 1955 के दिन वरली में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण आयोजित किया गया था। सभा में 50 हजार से अधिक जनसमुदाय उपस्थित था-

इस सभा में संत गाडगे महाराज, आयु. अनंत हरी गद्रे, आयु. संत मोडके महाराज, कांबले, करमालेकर और शे. का. फेडरेशन के अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।

इस अवसर पर डॉ. बाबासहब अम्बेडकर ने कहा-

कई दिन पहले मैंने निर्णय लिया था कि किसी भी कार्यक्रम में केवल भाषण देने के लिए उपस्थित नहीं रहना है। क्योंकि केवल भाषण देने से मैं अब ऊब गया हूं। मेरा सारा जीवन भाषण देने में गया है। ऐसा नहीं कि मेरे व्याख्यानों का समाज पर कोई असर नहीं हुआ हो। आज अस्पृश्य समाज में हुई जागरूकता मुझे दिखाई देती है। मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि उनमें हुई जागरूकता मेरे व्याख्यानों का ही फल है।

जागृति भले समाज की उन्नति का प्रमुख अंग है फिर भी केवल जागृति से कुछ नहीं होता। समाज की उन्नति के लिए विधायक कार्यक्रम की षरूरत होती है। किसी एक पुरुष द्वारा समाज में जागृति पैदा की गई और उसके बाद समाज का मार्गदर्शन करने वाला अगर कोई दूसरा पुरुष नहीं हुआ तो वह समाज एकखंभे वाले तंबू की तरहखस्ताहाल हो जाता है।

मुझे अब कुछ रचनात्मक करना होगा लेकिन उसके लिए पैसों की जरूरत पड़ती है। मैं एक बड़ा याचक हूं। समाज के अन्य लोगों का अंतरंग अगर साफ होगा और अगर इन साफदिल लोगों को मेरा काम अगर मंगलमय लगा और उन्होंने अगर पैसों की मदद की तो वह हमें चाहिए ही, लेकिन हम उनकी मदद पर निर्भर नहीं रह सकते। हमें अपने बल परखड़े रहना चाहिए।

‘लाश जिसकी होती है उसे वही कंधे पर ढोता है।’ इस कहावत के अनुसार हमें अपने काम का बोझखुद ही उठाना होगा। अपने कार्य के लिए हमें ही दिल खोलकर से दान देना चाहिए।

जनता, 22 जनवरी, 1955