330 14-1-1955 हिंदु धर्म में भगवान, आत्मा आदि की जगह है लेकिन मनुष्य के जीवन के लिए कोई स्थान नहीं - वरली (मुंबई) - Page 394

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बौद्ध धर्म में कोई भेदभाव नहीं है। सब ओर समानता दिखाई देगी। बौद्ध धर्म में आत्मा, भगवान के बारे में नहीं सोचा गया है बल्कि इंसान-इंसान के साथ किस प्रकार पेश आए इस पर सोचा गया है। इस धर्म में नीति के बारे में बताया गया है इसलिए यह सत्धर्म है। बाकी के धर्म झूठ हैं। ब्राह्मण और पुजारियों ने मिल कर हिंदू धर्म बनाया है। बौद्ध धर्म में मोक्ष दिलाने के लिए ईसाई लोगों की तरह धर्मगुरू नहीं हैं, आत्मा को सद्गति देने वाले, पूजा की विधियां और यज्ञादि करने वाले ब्राह्मण तो बिल्कुल भी नहीं हैं।

जो धर्म इंसान का कल्याण होने में उसकी मदद करेगा वही धर्म है। बौद्ध धर्म का स्थापना जीवन में कल्याण की साधना के लिए अत्यंत आवश्यक है। यही इस धर्म की महानता है।

अमेरिका में ईसाई धर्म पुरातन युग से है लेकिन अमेरिका जैसे प्रभावी राष्ट्र में दो हजार से अधिक बौद्ध भिक्षु हैं। पीढि़यों से चला आ रहा ईसाई धर्म त्याग कर उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया।

अमेरिका में फौज का सिपाही भी बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं। इतना ही नहीं तो बौद्ध धर्म के प्रति आस्था के तौर पर सैनिक अपनी वर्दी पर बौद्ध धर्म का चिन्ह लगाते हैं। अमेरिकी सरकार को उन्होंने बाध्य किया कि वे बौद्ध धर्म के चिन्ह के इस्तेमाल संबंधी कानून बनाने पर विवश किया। हाल ही में अमेरिका में एक विशाल विहार बनाया गया है। पूरी दुनिया से इस विहार निर्माण के लिए 20 लाख रुपयों का चंदा मिला।

जर्मनी के बारे में तो पूछिए मत। वहां बौद्ध धर्म प्रचार संस्था हजारों में हैं। योरोप में एक भी ऐसा देश नहीं है जहां बौद्ध धर्म का प्रसार नहीं होता। भगवान गौतम बुद्ध पूरी दुनिया में प्रसिद्ध युगपुरुष हैं। वहां के लोग राम, विष्णु, कृष्ण को नहीं जानते।

दुनिया अगर भारतीय को जानती है भगवान बुद्ध के कारण। भारतीय देश को इसी युगपुरुष की जन्मभूमि के तौर पर पहचाना जाता है। अनजाने ही ईसाई धर्म को स्वीकार करने वाले हिंदी विद्वान लोग पश्चाताप से विह्नल होकर आज मान रहे हैं कि तुलनात्मक नजरिए से बौद्ध धर्म ईसाई धर्म से श्रेष्ठ है।

हमें कल्याणकारी बौद्ध धर्म चाहिए। हमारे पुरखे अज्ञानी थे। महार की, भीख मांगना यही उनके काम थे। उनकी धर्म में कोई दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन हम आत्मनिर्भर बने हैं। हम और अन्य वर्गों के साथखड़े रहना चाहते हैं। धर्म में उन्नति का मार्गखुला होना चाहिए।

मेरे अन्य मित्रों को लगता है कि धर्म के कारण आर्थिक मामलों को नजरअंदाज करना होगा मैं कुछ आर्थिक मसलों पर काम करने जा रहा हूं। धार्मिक मसलों के कारण