330 14-1-1955 हिंदु धर्म में भगवान, आत्मा आदि की जगह है लेकिन मनुष्य के जीवन के लिए कोई स्थान नहीं - वरली (मुंबई) - Page 396

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दुनिया के कामकाज धर्म से चल रहे हैं । किसी जच्चा को बताया जाए कि यह बच्चा तुम्हारा दुश्मन है, तुम उसे दूध मत पिलाना, उससे तुम कमजोर बनोगी, जल्द बूढ़ी हो जाओगी, तुम्हारी सुंदरता घटेगी, यह बच्चा तुम्हारे लिए काल साबित होने वाला है। तो क्या बच्चे की मां इन बातों को मानेगी? कितना भी दुख होने पर, बीमारी में भी वह बच्चे को दूध पिलाएगी। बच्चे की परवरिश उसका धर्म है। दुनिया के सभी कामकाज धर्म के सहारे चलते हैं।

पुणे के लोगखुद भूखे रह करखाना (खाने के डिब्बे) पहुंचाने का काम करते हैं। बिरयानी, पुलाव जैसाखाना डिब्बों में बंद रहता है। लेकिन वे लोग कर्तव्य से और ईमानदारी से डिब्बे पहुंचाते हैं। इसीलिए सबको धर्म का पालन करना चाहिए। धर्म का सत्धर्म होना जरूरी है। अधर्म नहीं उसे सुकर्म होना चाहिए। दुष्कर्म नहीं।

धर्म को लेकर लोगों के मन पर कितना गहरा प्रभाव है यह हमेंखुद जाकर देखना चाहिए। हाल ही में मैं ब्रह्मदेश होकर आया। वहां की कुछ बातें आश्चर्यकारक हैं। वहां वर्गों में कम या ज्यादा का भेदभाव नहीं होता। किसी भी प्रकार की ऊंच-नीच की भावना को, वासना को वहां स्थान नहीं। जातिभेद नहीं। वहां सच्चा प्रजातंत्र है। उनके घर टेबल अथवा चारपाई की तरह लगते हैं। 15-20 फूट के। ऊपर लकडि़यां और चटाइयां लगी रहती हैं। अपने यहां दीवारें बनाने के लिए ईंटें, गारा, चूना, लोहा आदि काम में लाया जाता है। उनके घर का दरवाजा भी चटाई का ही बना रहता है। लात मारने से भी उनके घर टूट कर गिर सकते हैं।

वहां के लोग शाम 6 बजेखानाखाते हैं। शाम 6 बजे से 11 बजे तक घूमते-फिरते हैं। वहां चाय की दूकानें बंद होने के बाद सामान वहीं छोड़ते हैं। लेकिन वहां सामान की चोरी नहीं होती। हमारे यहां लोहे और सीमेंट से बनी दीवारें भी चोर तोड़ देते हैं। (हंसी)

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह कि ब्रह्मी लोग पैसा सम्भाल कर नहीं रखते।खाना और दान-धर्म करना यही वहां पैसे का उपयोग है। बैंक में उनका पैसा नहीं है। बुद्ध का कहना है कि नित्य कुछ भी नहीं है।

मंडाले पर्वत पर बुद्ध विहार है, वह देखने के लिए मैं गया। विहार देखने के लिए मैं 1080 सीढि़यां चढ़ा। अर्थात् मन का निश्चय था इसलिए। वैसे चढ़ने में मुझे दिक्कत होती है। इस विहार में बुद्ध की 14 फुट ऊंची मूर्ति है। यह मूर्ति पूरी सोने की बनी हुई है। वहीं ऊंची जगह पर एक पैगोडा बना हुआ है। उसमें करीब आधे करोड़ रुपयों का सोना है। सुबह से रात 11 बजे तक लोग प्रार्थना करने के लिए आते-जाते रहते हैं। रात 11 बजे के बाद वहां कोई नहीं बैठता। मूर्ति करीब 600 साल पुरानी है। लेकिन किसी ने आज तक रत्ती भर सोना भी नहीं चुराया है। लेकिन हमारे यहां देवी के गहने ब्राह्मण