330 14-1-1955 हिंदु धर्म में भगवान, आत्मा आदि की जगह है लेकिन मनुष्य के जीवन के लिए कोई स्थान नहीं - वरली (मुंबई) - Page 397

378 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पुजारी ही चुरा कर ले जाते हैं। (हंसी)

वहां के लोग झूठ नहीं बोलते। चोरी नहीं करते। क्योंकि बौद्ध धर्म यही बताता है।

यहां जब तक हिंदू धर्म है तब तक महारवाड़ा, मांगवाड़ा रहेंगे ही। इस धर्म की नीति ही ऐसी है। सब्जी-रोटी जैसे कार्यक्रम धर्म और रूढि़यों में बदलाव नहीं ला सकते। समाज सुधार कीखाल ओढ़ने वाले ब्राह्मण, धर्ममार्तंड जब तक यहां हैं तब तक यह सब ऐसे ही चलता रहेगा। मेरा यह कहना है कि, रोटी-सब्जी, सत्यनारायण के कार्यक्रम करने वाले भी बौद्ध धर्म में आएं।

एक बार विशाखा नामक शिष्या ने बुद्ध से सवाल पूछा कि, धर्म क्या है? उसे जवाब मिला कि, मलिन मन को साफ करना ही धर्म है। अस्पृश्यता सड़क पर पड़ा पत्थर नहीं है कि समाजसुधार करने वाले उसे उठा कर फेंक देंगे। हमारा मनोधर्म जब बदलेगा तभी धर्म भी बदलेगा।

दुनिया में सबसे पहले निम्न लोगों को धर्म की जरूरत महसूस होने लगी। रोमन, इटालियन साम्राज्य में गरीबों ने ही पहले ईसाई धर्म स्वीकारा।

विद्वानों का दावा है कि इस देश की संस्कृति एकरूप है। लेकिन उनका इतिहास झूठा है। यहां संस्कृति के दो प्रवाह हैं। एक ब्राह्मण धर्म का और दूसरा बौद्ध धर्म का। ब्राह्मण धर्म का गंदा पानी बौद्ध धर्म के साफ पानी में मिला। हिंदू धर्म के गंदे पानी को नाली बना कर बहा देंगे और साफ पानी को अपनाएंगे।

श्रीकृष्ण ने गीता में क्या कहा है? मारो, हत्या करो। गरीबों के उद्धार के बारे में कुछ बताया है? उसका कोई फायदा नहीं है। मैं गीता के बारे में लिखने वाला हूं।

इस धर्म के बारे में जानकारी पाने के लिए मैंने कई ग्रंथों का अध्ययन किया है। अपनी किताब में मैं इस धर्म का कैसे लोप हुआ इस बारे में लिखने वाला हूं। धर्मांतरण की मुझे कोई जल्दी नहीं है। अभी आप सभी को मैं भेड़ों की तरह नहीं ले जाना चाहता। मैं इसीलिए एक किताब लिख रहा हूं।

बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने के बाद उसके नियमानुसार चलना होगा। तलवार की धार पर चलने वाले पांच अनुयायी भी मिले तो बहुत हुआ।

बाद में कर्मयोगी संत गाडगे महाराज और दूसरों ने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को फूलों की मालाएं अर्पण कीं और सभा विसर्जित हुई।