237 17-2-1946 सिर पर कफन बांध कर हम युद्धभूमि में उतरे हैं - रमाबाई अम्बेडकर नगर (मुंबई) - Page 40

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द्रोण ने उससे गुरुदक्षिणा मांगी। अर्जुन सचमुच द्रुपद राजा को बांध कर ले आया और द्रुपद को द्रोण के चरण छूने पड़े।

भाइयों और बहनों, हम अल्पसंख्यक होंगे, गरीब भी होंगे, लेकिन हममें स्वाभिमान है। द्रोण की तरह ही प्रखर अभिमान पालते हुए आप सामर्थ्यवान शत्रु को भी हरा कर अपने पैर पकड़ने के लिए मजबूर करेंग। इस बारे में मुझे पूरा आत्मविश्वास है। (तालियां) । मृत्यु को भी पीछे छोड़ कर अपने समाज की आजादी के लिए पूरे आत्मविश्वास के साथ लड़ना यही अपनी प्रतिज्ञा है। (तालियों की गड़गड़ाहट)

काँग्रेस से तथा हिंदुओं से मैं कहना चाहता हूं कि मारधाड कर और दंगे फैला कर हम चुनाव जीतना नहीं चाहते। सामना ही करना हो तो हमने चूडियां नहीं पहनी हैं! (तालियां)। भले हमारे पास सामर्थ्य नहीं हो, स्वाभिमान जरूर है। जो हम पर हमला करेंगे उन्हें हमारी शरण में आने के लिए हम मजबूर करेंगे। (तालियों की गड़गड़ाहट)

हिंदुओं से मेरा बस इतना ही कहना है कि जिस प्रकार आपकी राजनीति अंग्रेजों की सत्ता से मुक्ति पाने के लिए है, उसी प्रकार हमारी राजनीति हिंदुओं की गुलामी से मुक्त होने के लिए है। आप जिस प्रकार अंग्रेजों का राज नहीं चाहते उसी प्रकार हमें हिंदुओं का राज नहीं चाहिए। आपकी नजर में- अंग्रेज जाएंगे तो हिंदुओं को स्वराज मिलेगा और हमारी नजर में- अंग्रेज जाएंगे और उनकी जगह हिंदू आएंगे। आज केंद्रीय मंत्रिमंडल में कुछ यूरोपीय लोग हैं। उनकी जगह ब्राह्मण, कायस्थ, बनिए बैठेंगे, लेकिन इन लोगों पर हमारा रत्ती भर भी भरोसा नहीं है। पिछले दो हजार सालों से हिंदुओं के कारण हमारी जान सांसत में थी। हजारों सालो से हिंदू रूपी अजगर हमारे शरीर को लपेटे हुए बैठा है। जिस दिन इस अजगर की गिरफत खुलेगी वही हमारी आजादी का दिन होगा! अपनी आजादी के लिए हम हिंदुओं की सत्ता का कड़ा विरोध करते हैं। हजारों वर्षों तक जिन्होंने हमें कुचला वे जब सत्ता में आएंगे तब उनका दिल पिघलेगा ऐसा कोई नहीं कह सकता! जो लोग हमारा स्पर्श होने मात्र से नहाते हैं, वे हमारा उद्धार करेंगे यह कोई पागल भी नहीं मान सकता। सत्ता अगर हिंदुओं को ही मिलेगी तो वह हमसे धोवा होग, इसीलिए इस देश की सत्ता में हमें हिस्सा मिलना ही चाहिए। हमारी यह लड़ाई सत्ता पाने के लिए ही है। हिंदु कितनी भी कूटनीतियां करें, रुकावटें करें इस देश के सत्ताधारी बनने की अपनी प्रतिज्ञा हम पूरी करेंगे ही। (तालियों की गड़गड़ाहट)

सबको एक सवाल परेशान किए हुए है कि संभावित अकाल को कैसे टाला जा सकता है? हिंदुओं से अकाल टालने के उपाय के बारे में पूछने पर वे बताते हैं कि राष्ट्रीय सरकार के सत्ता में आने तक अकाल टलने वाला नहीं। राष्ट्रीयय सरकार की सत्ता यानी अभी जो अंग्रेज मंत्री हैं उनकी जगह हिंदू मंत्रियों का आना। इस प्रकार बनने वाली सरकार किस प्रकार अलग किस्म की हो सकती है? कहते हैं, राष्ट्रीय सरकार के