22 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
आने से अकाल टलेगा! यह सरासर धोखाधड़ी की जा रही है। लुकाछिपी का खेल खेला जा रहा है। यह सब सत्ता हासिल करने के लिए हिंदुओं द्वारा कार्रवाई की जा रही है। आज का प्रसंग अस्पृश्यों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। हिंदू लोग हमारे हक छीनना चाहते हैं, लेकिन हमारा मरने का हक कोई भी छीन नहीं सकता। (तालियां) अपने अधिकार अगर हमें नहीं मिलें तो उन्हें पाने के लिए जान की बाजी लगाने की हमने ठानी है। हम बिल्कुल किसी की परवाह नहीं करेंगे चाहे गांधी नाक सिकोडें, व८भभाई दहाडें या फिर जवाहरलाल नेहरू जलभुन जाएं।
मुसलमानों की तरह हमारी मांगें बहुत ज्यादा नहीं हैं। हमारी आत्मनिर्भरता के लिए, हमारे विकास और उन्नति के लिए ये मांगें उचित ही हैं। उनमें गेहूं बराबर भी कुछ ज्यादा नहीं। हमारी मांगें बढ़ी-चढ़ी हैं ऐसा अगर काँग्रेस और हिंदुओं को लगता है तो मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि हमारी मांगों के बारे में सोच-विचार कर न्याय करने के लिए किसी अंतरराष्ट्रीय कोर्ट की नियुक्ति की जाए। कोर्ट में जो भी फैसला होगा उसे मानने के लिए हम तैयार हैं। आप भी उस कोर्ट की सिफारिशें मानने की उदारता अपने में ले आएं।
हमारी न्याय मांगें आप राजी-खुशी देने के लिए तैयार नहीं हैं और अगर टरायब्यूनल की नियुक्ति करने के लिए भी आप तैयार नहीं हैं तो ऐसे हालात में जो होना है वह होगा।
भाइयों और बहनों, अब हिंदू लोगों पर रत्ती भर भी विश्वास नहीं किया जाना चाहिए। अब तक दिए गए आश्वासनों की तरह ही काँग्रेस आगे दिए जाने वाले सभी आश्वासनों को भी तोड़ देगी। हिंदू समाज में समझदारी बिल्कुल नहीं है। जो भी कुछ है उसे मैं नाना फड़णविस की लफंगेगिरी कहता हूं। अपने न्याय हक हमें अंग्रेजों के इस देश से निकल जाने से पहले ही हासिल कर लेने चाहिए। इस राष्ट्र की राजसत्ता में अपना हिस्सा हमें प्राप्त करना ही होगा। यह बड़ा भाई दुश्मन से भी ज्यादा खतरनाक है। उन पर रत्ती भर विश्वास करना नुकसानदेह साबित होगा। इसीलिए, बाप की मृत्यु से पहले ही संपत्ति का बंटवारा होना चाहिए। बड़ा भाई अगर साम-दाम-दण्ड-भेद उपायों से भी नहीं मानेगा, हमें अपना हिस्सा मिलने की राह का अड़ंगा बनेगा तो अपनी सारी ताकत लगा कर अपना हिस्सा पाने की अपनी प्रतिज्ञा पूरी करके रहेंगे। (तालियों की गड़गड़ाहट)
11 मार्च, को जो चुनाव होने जा रहे हैं उसके बारे में बताना मैं जरूरी समझता हूं। ई और एफ वॉर्ड में हमारे 28 हजार और हिंदुओं के एक लाख चौंतीस हजार मतदाता हैं। जी वार्ड और सबर्बन में हमारे 32 हजार और एक लाख चौदह हजार हिंदुओं के मतदाता हैं। हिसाब लगाने से पता चलेगा कि हमारे मतदाता कम हैं। यह लड़ाई है। महाभारत में कौरवों की सेना का आंकड़ा 11 अक्षौहिणी और पांडवों की सेना का आंकडा 9 अक्षौहिणी बताया गया है। आंकड़ों के हिसाब से कौरवों की जीत होनी चाहिए