386 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बुद्धि को, आपके विवेक को अगर ठीक लगे तो ही धर्म का यह मार्ग स्वीकारें। अंधे बन कर चार लोगों के पीछे आप चलने का आदेश और दूसरी ओर बुद्धि का आह्नान। दो विचारधाराओं में कितना बड़ा अंतर है!
कोई भी सवाल पूछे जाने पर बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों ने कानों पर हाथ रखे। याज्ञवल्क्य ऋषि से पूछा आप आत्मा के बारे में बताते हैं तो आत्मा है कहां? जवाब मिला - नेति, नेति! यानि कि, मुझे पता नहीं। अच्छा, फिर आत्मा का मृत्यु के बाद क्या होता है? जवाब मिलता है - नेति, नेति! ठीक है, यह पता नहीं भी होगा लेकिन आत्मा का आकार तो पता होगा इसलिए एक और सवाल पूछा कि - क्या आत्मा ताड़ के पेड़ जितनी है? तब भी जवाब मिलता है - नेति, नेति! - अर्थात् सिर्फ और सिर्फ ‘ना’।
आत्मा का स्थान क्या है, उसका आकार कैसा है, आगे उसका क्या होता है इस बारे में बिल्कुल भी जानकारी न होने के बावजूद आत्मा के बारे में इतना बेमतलब का बोला गया है कि केवल बार-बार यह शब्द सुन कर ही एक काल्पनिक वस्तु के अस्तित्व के बारे में बढ़-चढ़ कर हामी भरी जा रही है। प्रियतमा का नाम पता नहीं, गांव के बारे में पता नहीं, रंग-रूप या उम्र का पता नहीं लेकिन मैं उसे चाहता हूं - ऐसा बताने वाले पागल रसिक की तरह ही हालत आत्मा के अस्तित्व पर विश्वास करने वालों की होती है।
सच कहो, तो आत्मा नहीं है यह साबित करने की जरूरत ही नहीं है। जो कहते हैं कि आत्मा है उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे उसे दिखा दें। आत्मा नहीं है यह सत्य है। आत्मा है यह प्रचार ही भ्रम है।
आत्मा का अस्तित्व साबित करने के लिए पुनर्जन्म की कहानी गढ़ी गई। शरीर नाशवान है, आत्मा एक शरीर छोड़ कर दूसरे शरीर में प्रवेश करती है आदि कोपलकल्पित कहानियाँ कही जाती हैं। शरीर काटने पर शरीर का हर अंग दिखाई देता है, लेकिन यह आत्मा दिखाई नहीं देती, क्यों? अच्छे-अच्छे शल्यक्रियाविशारद हैं, जाकर उनसे पूछिए, उनसे कहें कि बताइए आत्मा कहां है? शरीर से निकाल कर दिखाइए।
बौद्ध दर्शन में पुनर्जन्म माना जाता है ऐसा तुरंत कहा जाएगा। लेकिन उस सिद्धांत का आत्मा के साथ कोई ताल्लुक नहीं है। बौद्ध पुनर्जन्म सिद्धांत अर्थात् पुनर्निर्माण। प्रकृति की पुनरावृत्ति। पिता के चेहरे जैसा चेहरा लेकर पुत्र पैदा होता है इसलिए वह पिता नहीं है। पिता के सभी गुणों का वास पुत्र में नहीं होता। क्योंकि, पिता के साथ में माता के गुण भी उसमें आते हैं। साथ ही वातावरण का असर भी होता है। एक आम से दूसरा आम पैदा होता है। इसी तर्ज पर चलने वाली घटनाओं को पुनर्निर्माण कहते हैं। हालांकि जमीन के साथ पानी हवा खाद के असर से जैसे एक आम के पेड़ पर मीठे फल पैदा होंगे वैसा ही फल दूसरे पेड़ पर पैदा होगा इसका भरोसा नहीं। अगर अच्छा