388 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जिस पतित व्यक्ति को अपनी स्थिति का अहसास होता है और जिसे हमेशा उसका मन कचोटता रहता है वे अपनी स्थिति से उबरने की कोशिश करते रहते हैं। अपने अहसासों के कारण वह अपना उद्धार कर सकता है। लेकिन दूसरी तरह के पतितों में सुधार संभव ही नहीं होता। क्योंकि उसका मन ही उस तरह का होता है।
इस प्रकार अपने अधःपतन के बारे में जिन्हें बुरा लगता है उनका मार्गदर्शन करने के लिए समाजसेवकों की जरूरत है। समाज को वैचारिक भूमिका देने के लिए और सांस्कृतिक कार्य करने के लिए सेवकों की जरूरत होती है। गरीब समाज उन्हें मेहनताना नहीं दे सकता। लेकिन उनके उदरनिर्वाह का प्रबंध किया जा सकता है। ऐसे कार्यकर्ताओं को बैठ करखाने वाला नहीं कहा जा सकता। क्योंकि, समाजसेवा करने केलिए हजारों आकर्षणों को छोड़ना पड़ता है।
बौद्ध भिक्षुओं का संगठन ऐसे ही लोगों के लिए भगवान बुद्ध ने बनाया है। यह बेहद कठिन कार्य है। उसको स्वीकार कर भगवान बुद्ध द्वारा बताए गए मार्ग से आगे बढ़ने से आज दुनिया का कल्याण हो सकता है। मानवता का हित हो सकता है।