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बौद्ध धर्म और हिंदु धर्म में जमीन-आसमान का फर्क है
‘‘भारतीय बौद्धजन समिति के तत्वावधान में और आयु. मंगलदास पक्वासा, पूर्व राज्यपाल, मुंबई की अध्यक्षता में 8 मई, 1955 को शाम 7 बजे, नरे पार्क, सेंट्रल रेल वर्कशॉप के सामने, परेल, मुंबई - 12 इस स्थान पर बड़ी धूमधाम से भगवान गौतम बुद्ध जयंति उत्सव आयोजित किया जाना है। जुलूस के लिए तीन मार्ग तय किए गए हैं। उसके अनुसार विभिन्न जगहों के लोग इस जुलूस में शामिल होने की कृपा करें। शाम 4.30 बजे जुलूस निकलेगा और शाम सात बजे तक नरे पार्क आएगा, इसका जुलूस में शामिल लोगखयाल रखें। अन्य लोग सीधे नरे पार्क मैदान पर शाम सात बजे तक पहुंच जाएं।’’ समिति के सचिव ने ‘जनता’ के 7 मई 1955 के अंक में इस बात की जानकारी प्रकाशित की है।
इस घोषणा के अनुसार दिनांक 8 मई, 1955 को मुंबई के नरे पार्क में बुद्ध जयंति के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में 80 हजार लोग उपस्थित थे। सभा को संबोधित करते हुए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा-
अध्यक्ष महाराज, बहनों और भाइयों,
आज मैं यहां अचानक ही आ गया हूं। इस सभा में मेरी उपस्थिति की उम्मीद नहीं थी। आज-कल में मुझे दिल्ली जाना पड़ेगा ऐसा मेरा अनुमान था। संयोग की बात है कि 12 तारीख तक का टिकट उपलब्ध न होने के कारण मैं यहीं रहा। इस मौके का फायदा उठाते हुए मुझसे विनती की गई कि मैं इस सभा में उपस्थित रहूं। उनकी विनती का सम्मान करते हुए मैं आज उपस्थित हूं।
पूर्व गवर्नर अध्यक्ष हैं सो मुझे इस सभा में नहीं आना चाहिए था। मेरे आने से सभा को महत्व प्राप्त होगा ऐसा मुझे नहीं लगा था। लेकिन लोगों का कहना न मानना योग्य नहीं होता। यहां इतनी बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति देख कर मुझेखुशी हुई। आप सब लोगों को आंदोलन के प्रति गर्व है। वह माफगांव के अड्डे पर रहता है, मैं भायखला की पीली चाल में रहता हूं। कोई कार्यक्रम अगर होना है तो वह मेरे ठिकाने पर ही हो ऐसी मंशा रखते हैं। अपनी-अपनी गली में कोई न कोई समारोह-कार्यक्रम करते हैं। इस रूढि़ को भुला कर एक राय से इस कार्यक्रम का आयोजन किया इसके
जनताः 14 मई, 1955