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थी लेकिन अल्पसंख्यक पांडव विजयी हुए। इसी प्रकार हमारे हर मतदाता को उस दिन जाकर अपना वोट देना होगा। हिंदुओं के मतदाता बहुत ज्यादा हैं। काजरोलकर को अगर 1,34,000 वोट मिलेंगे तो वह सीधे स्वर्ग में पहुंच जाएगा। वहां क्या है मैं नहीं जानता। (हंसी) हमारे सभी मतदाताओं को उस दिन वोट देना होगा। पहले श्राद्ध के दिन जिस तरह सब इकठ्ठे हुआ करते थे उसी प्रकार 11 मार्च को वोट देने के लिए आप लोगों को जाना होगा। 3 जनवरी को मुंबई में हुए प्राथमिक चुनावों में अपने दोनों उम्मीदवारों को 11-12 हजार वोट मिले थे। काँग्रेस के उम्मीदवार को 2-2 हजार वोट मिले। पुरभय्यों को महार-मांगों के नाम याद करवा कर उनसे ये वोट दिलवाए। इससे हमें सीख लेनी चाहिए। आने वाले चुनावों में हो सकता है कोई और आपके नाम से वोट दे जाए। हमें गाड़ी-घोड़ा कुछ नहीं मिलेगा। काँग्रेस वालों के पास उस दिन बहुत गाडि़यां होंगी। आप लोग चलकर जाएं और अपना वोट दें। चुनाव के दिन काँग्रेस के लोग आपको डराएंगे। धमकियां देंगे। इस बारे में समता सैनिक दल के लोगों को जागरुक रहना होगा। हिंदू हमारे खिलाफ हैं ही, सरकार की पुलिस भी हमारे खिलाफ है। इसीलिए अपने लोगों को सुरक्षा मुहैया कराने की जिम्मेदारी समता सैनिक दल पर ही है। इससे पूर्व दल का प्रदर्शन अच्छा रहा है। अपने लोगों को काँग्रेस या पुलिस से कोई परेशानी न हो इसका
ख्याल समता सैनिक दल को रखना होगा।
इससे पूर्व समता सैनिक दल ने कई बार प्रशंसनीय काम किया है। इस दल पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। कार्य की दक्षता के लिए दल को केवल इस बार फेडरेशन के अध्यक्ष श्री जाधव के मार्गदर्शन में काम करना होगा।
मुझे पक्का विश्वास है कि हमारे प्रतिनिधि अपने विरोधियों को न सिर्फ हराएंगे बल्कि उन्हें चारों खाने चित करेंगे। आज काँग्रेस के लोग प्रजातंत्र के नाम की जय बोल रहे हैं। क्या वे प्रजातंत्र का मतलब जानते भी हैं? अगर जानते हैं तो उन्हें लोगों से ना सही अपने मन से श²मदगी महसूस होनी चाहिए। जिन्हें 90 प्रतिशत वोट मिलते वे चुने गए हैं ऐसा वे समझते, कोई लड़ाई नहीं करता। मुझे आपसे बड़ी उम्मीद है कि 11 तारीख को आप विरोधियों को धूल चटाएंगे। आपने मुझे 17000 रुपयों का चेक दिया इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूं हालांकि ये रकम चुनावों की चटनी के लिए भी काफी नहीं हैं। हम अखबारों में पढ़ते हैं कि गांधीजी को पांच लाख की थैली अर्पण की गई। नेहरू को 3 लाख की थैली अर्पण की गई। कम पैसा मिला इसका बिल्कुल खेद नहीं है लेकिन इस काम में जरूरत बहुत अधिक की है। हमारी राजनीति बिकाऊ नहीं है। यह दिलों की, अंतःकरण की राजनीति है। पिछले 20 सालों में कभी मुझे एकमुश्त 5000 रुपए भी नहीं मिले हैं। इसका मुझे कोई खेद नहीं है। हमारे लोग हिंदुओं के कंधे से कंधा लगा कर बैठते हैं। मेरे लोगों में उन्नति का आत्मविश्वास जगा है। इसी में मुझे खुशी है।