333 8-5-1955 बौद्ध धर्म और हिंदु धर्म में जमीन-आसमान का फर्क है - परेल (मुंबई) - Page 411

392 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अंग्रेज सरकार के आने पर मुंबई पर उनका अधिकार बना। सुनारों पर पेशवाओं की नजर थी। सुनारों का कहना था कि वे ब्राह्मण हैं। पेशवे कहते हम ब्राह्मण हैं। सुनार ब्राह्मणों की तरह धोती पहनते। उन्हें इस प्रकार धोती नहीं पहननी चाहिए, उनके कारण भ्रष्टाचार हुआ इस प्रकार सभी अखबारों में छप गया। अंग्रेजों ने धर्म डुबाया कह कर सब लोग हल्ला मचाने लगे। अंग्रेज बौखला गए। पेशवा की शिकायत उन्होंने सुनी। पेशवा ने कहा, हमारे प्रजाजनों पर पहले प्रतिबंध थे। आपके आने के बाद वे कासोटा पहनने लगे हैं। तब ईस्ट कंपनी भारत में आई ही थी। वालकेश्वर में महाजन लोग रहते थे। मुख्य अधिकारी ने शिकायत सुनी। उन्होंने महाजनों को बुलाकर पूछताछ की। बात सामने आई कि सुनार झालरवाली धोती पहनने लगे थे। हुकम हुआ, सुनार ऐसी धोती नहीं पहनेंगे। पंचों ने उन पर पचास रुपयों का जुर्माना लगाया। अब लोग कोट-पतलून पहनने लगे हैं।

गाड़ी में बैठने लगे हैं इसके अलावा इनमें कोई सुधार नहीं हुआ है। फिर ये लोग क्यों आलोचना करते हैं? ये कैसे हमारे हितचिंतक हुए? वे कहते हैं कि आपने अगर बौद्ध धर्म अपनाया तो आपको मिलने वाली स्कॉलरशिप्स बंद हो जाएंगी। मिलों में काम करने वालों को स्कॉलरशिप्स की अहमियत क्या पता चलेगी? जो स्कूलों में पढ़ते हैं उनके लिए स्कॉलरशिप्स की अहमियत होती है। पत्रकारों को ऐसा क्यों लगता है? कहते हैं, स्कॉलरशिप्स नहीं मिलेंगी। अरे उसे दिलाने के लिए मैं अभी जिंदा हूं ना! (तालियां) मेरे मरने के बाद जो होना है सो होता रहेगा। जब तक मैं जिंदा हूं तब तक डरने की कोई वजह नहीं। सिक्ख अस्पृश्यों को स्कॉलरशिप मिलती है। स्कॉलरशिप धर्म पर निर्भर नहीं है। वे दीनता पर निर्भर करती है। और आपने दी ही कितने दिन? ‘यावच्चंद्रदिवाकरौ’ ऐसा तो नहीं? चांद-सूरज जब तक हैं क्या तब तक स्कॉलरशिप्स मिला करेंगी? वे साल भर के लिए होती हैं या फिर दो साल, तीन सालों के लिए होती हैं। कुंकुम लगाना है तो पति जिंदा रहेगा या नहीं इसका भरोसा होना चाहिए। सरकारी नौकरी कितने सालों तक टिकेगी? मैंने कुछ कहा और पांच सालों के बाद मुन्शी साहब के पेट में दर्द होने लगा। उन्होंने मुसलमानों को दी गई रियायतें वापिस लीं। ईसाइयों को भी रियायतें मिली हुई थीं। लेकिन उनका एक आदमी था जो गवर्नर बनना चाहता था। उन्होंने बताया कि मुझे कुछ नहीं चाहिए। फिर उनके कागजात मेरे पास आए। मैंने उसे फाड़ कर फेंक दिया। और लोग सोने का हार पहनते हैं, तो क्या हम गले में फांसी लटका लें? मैंने लिख कर दिया, नहीं हो सकता। आज तक हमने उसे रखा लेकिन अब उसका कोई फायदा नहीं।

हममें से एक व्यक्ति इंजीनियर बनने के काबिल है। लेकिन अब तक उसे इंजीनियर नहीं बनाया गया है। हमारे मुख्यमंत्री भी इसमें शामिल हैं। राजा ही अगर प्रजा को मारने