333 8-5-1955 बौद्ध धर्म और हिंदु धर्म में जमीन-आसमान का फर्क है - परेल (मुंबई) - Page 413

394 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

को ध्यान में रखें।

हमें स्वाभिमान की जिंदगी चाहिए। उसमें अगर दरिद्रता मिले तो भी कोई परवाह नहीं। मैं 48 नंबर की चॉल में 50 नंबर के कमरे में रहता था। सोने के लिए जगह नहीं। तकिया और धोती लेकर ऊपर छत पर सोने जाता था। खाने-पीने को मिलता है तो वह कोई महत्वपूर्ण बात नहीं है। स्वाभिमान की जिंदगी का महत्व है। कीड़ेमकोड़ों की जिंदगी हम नहीं जिएंगे। मेरे बौद्ध धर्म में जाने को लेकर कुछ लोग कहेंगे, पॉलिटिक्स का कीड़ा गया। लेकिन पॉलिटिक्स का यह कीड़ा नहीं जाएगा। रहेगा और इन लोगों को लेकर ही जाएगा।

बौद्ध धम्म के बारे में मेरी कल्पना अलग है। इस धर्म के लोग वकील, बैरिस्टर, प्रधानमंत्री होंगे ऐसा प्रावधान होना चाहिए। यह धर्म हमें पावन करेगा। पथभ्रष् करने वाले लोगों की कोशिशों पर ध्यान ना दें।

ये लोग कहते हैं कि हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म में कोई फर्क नहीं है। सो इसमें जो अच्छी बातें हैं उनका अनुसरण क्यों नहीं करते? अच्छी बातों का अनुसरण हमें क्यों नहीं करने देते? कोई यह न बताएं कि बौद्ध धर्म बुरा है। कोई यह कह नहीं सकता कि यह धर्म बुरा है। पूरे भारत देश को बौद्ध धर्म अपनाना चाहिए। बौद्ध धर्म और हिंदु धर्म एक ही हैं यह सरासर गलत है। उसमें जमीन-आसमान का फर्क है। इसे साबित करने के लिए मैं पांच-सात मुद्दे आपके सामने रखने वाला हूं। हिंदू धर्म में कई भगवान हैं। तैंतीस करोड़ भगवान हैं। उनका भगवानों के बगैर काम नहीं चलता। सृषि् कैसे बनी? कोई कहता है, किसी ने अंडा डाला लेकिन किसी को भी यह पता नहीं है। भगवान ने कहा, सृष्टि का निर्माण कैसे हुआ, कहा नहीं जा सकता। यह महत्वपूर्ण मसला नहीं है। किसी चीज से उसका निर्माण किया गया या जब कुछ भी अस्तित्व में नहीं था तब किया गया यह दो विकल्प हो सकते हैं, तीसरा कोई विकल्प नहीं है।

यह बात असंभव है कि दुनिया में जब कुछ भी नहीं था तब उसका निर्माण किया गया। ईश्वर सृष्टि का निर्माणकर्ता नहीं था। हिंदू धर्म में ईश्वर है, बौद्ध धर्म में नहीं है। यही प्रमुख भेद है। बौद्ध धर्म में आत्मा नहीं, हिंदू धर्म में है। एक बार अर्जुन ने कृष्ण से पूछा, आत्मा कैसी है? जवाब मिला, आत्मा ऐसी है जिसे लोहे से काटने से भी घाव नहीं बनता। लोहे से लोहा काटा जा सकता है। क्या ऐसा हो सकता है कि, आत्मा ऐसी चीज है कि जिस पर लोहे से घाव नहीं किया जा सकता। श्रीकृष्ण ने जवाब में यह भी कहा कि आत्मा को जलाया नहीं जा सकता। उसका कहना है कि आत्मा को क्लेश ही होते। बुखार-खांसी आते हैं जुकाम भी होता है यह सब झूठ है। इसमें कोई सत्यता नहीं। भगवान ने एक बार पूछा, आत्मा कितनी बड़ी है? उसकी साइज क्या है? लंबाई-चौड़ाई कितनी है? आत्मा होती कहां है? याज्ञवल्क्य से हजारों सवाल पूछे गए। ब्राह्मणों ने ग्रंथ