333 8-5-1955 बौद्ध धर्म और हिंदु धर्म में जमीन-आसमान का फर्क है - परेल (मुंबई) - Page 414

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बना कर ब्रह्म है इस बात को लोगों के गले में ठूंसा है।

तीसरी बात - हिंदू चारवर्णों को मानते हैं। लेकिन बौद्ध धर्म में चातुर्वर्ण्य या जाति भेद नहीं हैं। एक बार लोहित ब्राह्मण ने भगवान से पूछा, तुम शूद्रों को विद्या क्यों देते हो? असल में होना यह चाहिए कि जो योग्य है उसे विद्या मिले और जो योग्य नहीं है उसे नहीं मिले। लेकिन ब्राह्मण धर्म ऐसा नहीं है। एक बार बुद्ध ने अपनी माता से पूछा, संकट के समय हत्या करना ठीक कैसे हो सकता है? बौद्ध धर्म में ऐसा नहीं कहा गया है। वैश्य क्योंकर दगाबाजी कर सकते हैं? बौद्ध धर्म में जातिभेद, असमानता, चातुर्वर्ण्य नहीं हैं। जातिवाद समाप्त करने के बारे में प्रस्ताव पारित किए जाते हैं। लेकिन वे बस उससे आगे नहीं बढ़ते। उस पर अमल करने के लिए कहो तो वे नहीं करते। जातिवाद के कारण अपरिमित हानि हुई है। जातिवाद को समाप्त कीजिए। सभी नेक राह अपनाएं। लेकिन वे ऐसा नहीं चाहते।

भाइयों और बहनों, शिवाजी के अष्ट प्रधान ब्राह्मण थे। उसकी कहानी अलग है। वे मराठों को अपने साथ भोजन करने नहीं देते थे। शिवाजी ने बालाजी आवजी को यह बात बताई। उसने कहा, जब तक आप राज्याभिषेक नहीं करवा लेते तब तक आपका दरजा स्तर बढ़ेगा नहीं। आखिर शिवाजी ने कहा, जो भी करना हो आप ही कीजिए। तब मोरोपंत पिंगले मुख्य प्रधान था। उसने कहा, ‘क्यों रे बच्चू, तू हमारा राजा बनेगा!’ उसने शिवाजी की बेइज्जती की। आखिर बालाजी आवजी राजपुताने की ओर गया। वहां उसने शिवाजी की वंशावली बनाई। काशी से ब्राह्मणों को लाकर राज्याभिषेक करवाया।

जातिवाद के गोबर के कीड़े गोबर में ही रहेंगे। उनकी उससे उबरने की इच्छा नहीं। उनकी अकल जागेगी तब वे हमारे पास आएंगे। उन्हें लगता है, हिंदु समाज से केवल दो ही लोग जाएंगे। डॉ. अम्बेडकर और उनकी पत्नी। लेकिन बौद्ध धर्म को लेकर बहुत बार मतपरिवर्तन हुए हैं। अगले साल सारनाथ में बुद्ध के शिष्य जमा होंगे। उनके ऊपर उत्तर प्रदेश सरकार 35 लाख रुपएखर्च करने वाली है। भारत सरकार दो करोड़ रुपए

खर्च करने वाली है। उत्तर प्रदेश पिछड़ा देश है। उसे पूर्वी गोंडबन-आर्यावर्त कहते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के पैंतीस लाख रुपए यानी केवल कोंपलें हुईं। कोई कुछ करे या न करे बौद्ध धर्म इस देश में आएगा। कोई उसकी राह में नहीं आ सकता। इस बाढ़ में सभी बह जाएंगे। इस देश की सभी जनता अज्ञानी थी। ब्राह्मणों ने किताबों में क्या लिखा है इसका उन्हें पता नहीं था। 2-4 आने में ये किताबें मिलती हैं। यहां आने से पहले मैं भागवत पढ़ रहा था। उस पर ज्ञानवान व्यक्ति ऐसी किताबें कैसे लिख सकते हैं?

आप अज्ञानी हैं। आपमें से जो पढ़े-लिखे बच्चे हैं वे भी अज्ञानी हैं। दो-तीन दिनों पहले मैं उपनिषद पढ़ रहा था। उसमें से छांदोग्य उपनिषद में गुरु-शिष्य संवाद है। शिष्य अपनी शंका पूछता है। लेकिन उसका शक हटाने के लिए भी ज्ञान चाहिए। गुरु जवाब