333 8-5-1955 बौद्ध धर्म और हिंदु धर्म में जमीन-आसमान का फर्क है - परेल (मुंबई) - Page 415

396 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

देते हैं कि, तुम्हारे पास ज्ञान नहीं इसलिए तुम्हें शक करने का भी अधिकार नहीं है। तो बताइए, हमारे विद्वानों को इसका क्या ज्ञान हो सकता है?

बुद्ध ने आनंद से यही कहा कि केवल मैं कहता हूं इसलिए आप इस धर्म को ना अपनाएं। व्यवहार में यह धर्म चल सकता है ऐसा अगर आपको लगे तभी आप इस धर्म को अपनाएं। अपनाएंगे तब आपको एक जान, एक चित्त बन कर रहना होगा। इसी राह से अपना उद्धार होगा।

बौद्ध धर्म में दो तरह के लोग हैं। इस धर्म का अनुसंधान करना मेरा मार्ग नहीं। हमारा मुख्य कार्य है प्रचार करना हम लोगों को बुद्धिस्ट बनाना चाहते हैं। यही हमारा कर्तव्य है। दो-चार दिनों पहले हमने एक संस्था की स्थापना कर उसे रजिस्टर करवाया है। आपसे विनती है कि आप इस सभा के सदस्य बनें। उच्च वर्ग के लोग चंदा देंगे ऐसी उम्मीद नहीं है। कार्य की शुरुआत होना जरुरी है। इसीलिए सबको समिति के सदस्य बनना होगा। इसके लिए एक रुपया देना होगा। हमें विहार बनाने होंगे। वहां महिलाएं और पुरुष जाकर भक्तिभाव से पूजा करेंगे। हममें कुछ मुफतखोर लोग भी हैं। ऐसा अब यहां नहीं चलेगा। बिना रसीद के कोई पैसे न दें। आयु. बी. एस. गायकवाड़, आयु. का. वि. सवादकर, श्री बालू कबीर आपसे फॉर्म भरवा कर आपको रसीद देंगे।