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विद्या क्यों सिखाते हो? इस पर भगवान ने उससे कहा, कि जिस प्रकार मनुष्य प्राणी को अनाज की षरूरत है उसी प्रकार सबको विद्या की जरूरत होती है। इस जमीन पर सोच-विचार का यह तरीका सबसे पहले भगवान बुद्ध ने ही शुरू किया। (तालियां) विद्या एक तरह की तलवार है। यह दोधारी तलवार है। उससे दुष्टों का संहार किया जा सकता है और दुशें से अपनी रक्षा भी की जा सकती है। कहा भी गया है कि -
स्वदेशे पूज्यते राजा।
विद्वान सर्वत्र पूज्यते।।
आप सब लोग विद्या सीखने के लिए आए हैं। लेकिन मेरी राय में केवल विद्या ही पवित्र नहीं हो सकती है। विद्या के साथ भगवान बुद्ध द्वारा बताई गई प्रज्ञा परिपक्वता चरित्र अर्थात् सदाचरण से संपन्न आचरण, करुणा अर्थात् सभी मानव जाति के बारे में प्रेम का भाव और मैत्री अर्थात् सभी प्राणि-मात्र के लिए आत्मीयता ये चार पारमिताएं भी होनी चाहिएं। तभी विद्वत्ता का उपयोग है। विद्या के साथ अगर मानव के पास करुणा नहीं होगी तो वह कसाई ही है ऐसा मुझे लगता है। करुणा अर्थात् मनुष्य का मनुष्य से प्रेम। मनुष्य को इससे भी आगे जाना चाहिए। उसे मैत्री प्राप्त करनी होगी। यह सोच भगवान बुद्ध ने ही रखी। मैं अपने जैसा विद्वान भारत में देखना चाहता हूं।
सभी धर्मों में श्रेष्ठ धर्म अगर कोई होगा तो वह है भगवान बुद्ध का बौद्ध धर्म। अन्य धर्म निरर्थक हैं। मेरे धर्म में ईश्वर का कोई स्थान नहीं है। लोग बताते हैं कि ईश्वर ने सृष्टि का निर्माण किया। उसने निराकार से साकार और साकार से निराकर निर्माण किए। लेकिन इस दुनिया में साकार चीजें पहले थीं और हैं। ईश्वर अगर होता तो वह इस बात की ओर ध्यान नहीं देता ऐसा नहीं ही होता। इसीलिए ईश्वर है, यह कल्पना ही झूठी है। भगवान अगर होगा भी तो रोजमर्रा की जिंदगी में उसका बेकार अड़ंगा क्यों रहे? मेरे धर्म में आत्मा का भी स्थान नहीं है। बौद्ध धर्म की नींव दुख दूर करना है। वही धर्म मेरी राय में सर्वश्रेष्ठ है जो मनुष्य का दुख दूर करता है। अन्य धर्म मनुष्य और ईश्वर के काल्पनिक संबंधों के आधार से बने हुए हैं।
दुनिया में कुछ लोग डरपोक होते हैं। इंसान को अकेले चलने का साहस दिखाना होगा। मैं अकेले चलने का साहस करता हूं। (तालियां) मेरे पीछे भले हजारों लोग न हों मैं उनकी परवाह नहीं करता। या उनके बारे में बेकार की चिंता भी नहीं करता।
एक डॉ. पिक्विक और उसके चार दोस्त थे। उसने अपने दोस्तों से कहा, मैं आपको मेला दिखाता हूं। अपने दोस्तों के साथ वह एक गांव में गया। वहां उन्होंने दो-तीन कमरे किराए पर लिए। उस गांव में चुनाव थे। डॉ. पिक्विक की कंपनी से सैम वेलर नाम के एक लड़के को उसके साथ उसकी सेवा के लिए रखा गया था। चुनावों की धूमधाम देखने