400 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के लिए वह उस कमरे से बाहर देखने की कोशिश करने लगा। दरवाजाखोलने और बंद करने लगा। डरपोक डॉ. पिक्विक ने उससे पूछा कि तुम यहां क्या कर रहे हो? उसने जवाब दिया, ‘सर, वहां विशाल जन-समूह इकठ्ठा हुआ है।’ सैम वेलर बाहर निकलने की कोशिश करने लगा। तब डॉक्क्टर ने उसे चेताया कि, ‘विशाल जन-समूह के साथ जाना। छोटे विशाल जनसमूह के साथ नहीं जाना।’ उसके बाद एक बार फिर बताया - ‘यह बड़ा विशाल जनसमूह जहां जाए वहां जाना, अथवा उसके पीछे जाना।’ लेकिन मैं आपसे केवल इतना कहना चाहता हूं कि ऐसे विशाल जनसमूह के पीछे नहीं जाना।
विद्या, प्रज्ञा, करुणा, चरित्र और मैत्री इन पांच तत्वों के अनुसार मिलिंद महाविद्यालय के हरेक छात्र को अपना चरित्र बनाना होगा। इस राह से अकेले ही जाना पड़े तब भी धैर्य और निष्ठा बनाए रख कर जाना होगा। ‘महाजनो येन गतः सपन्थः’ जैसी दूसरों के विवेक से चलने वाली बुद्धि का त्याग कर विवेक के सहारे, अपने को जो राह ठीक लगती है उसी राह से आगे बढ़ना चाहिए।