403
337
बौद्धों तथा जैनियों की अहिंसा में बहुत फर्क है
नई दिल्ली के बुद्धविहार में महाबोधि सोसाइटी द्वारा दिनांक 5 फरवरी, 1956 के दिन डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा-
कम्युनिझम को जवाब नहीं दे पाने वाला कोई धर्म अस्तित्व में नहीं रह पाएगा। मेरी राय में कम्युनिझम का प्रतिकार करने के लिए उपयुक्त होगा तो केवल बौद्ध धर्म ही।
जो लोग सभी धर्मों में आस्था रखते हैं और सभी धर्मों से थोड़ा कुछ चुनते हैं उनसे मैं सहमत नहीं। भारत में इस तरह की मानसिकता देखने में आती है। हरेक अपनी तरफ से चुनाव करे और उस पर निर्भर रहे।
हर धर्म अन्य से अलग होने की ही संभावना है। बौद्ध धर्म द्वारा जिस अहिंसा का उपदेश दिया जाता है और जैन धर्म द्वारा जिस अहिंसा का उपदेश दिया जाता है उनमें जमीन-आसमान का फर्क है। जैन धर्म ने अहिंसा को अति तक पहुंचाया।
डॉ. बाबासाहेबांची भाषणे मा. फ. गांजरे,खंड 7, पृ. 188