338 18-3-1956 रोटी से अधिक महत्व स्वाभिमान का है - आगरा - Page 423

404 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

338

रोटी से अधिक महत्व स्वाभिमान का है

18 मार्च, 1956 के दिन आगरा में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण आयोजित किया गया था। सभा में अध्यक्ष पर थे उत्तर प्रदेश शे. का. फे. के अध्यक्ष आयु. तिलकचंद कुरील। मंच पर आयु. श्रीकृष्णदत्त पालीवाल और उत्तर प्रदेश के कई मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता और नेता उपस्थित थे। सभा में करीब दो लाख का जनसमुदाय उपस्थित था।

ठीक साढ़े छह बजे समारोह के आयोजन स्थल रामलीला मैदान में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का आगमन हुआ।

रामलीला मैदान में प्रवेश करते ही ‘अम्बेडकर की जय हो’ के नारों से आसमान गूंज उठा। केवल आगरा ही नहीं वरन् आसपास के गांव-शहरों से उनका भाषण सुनने के लिए हजारों की संख्या में अस्पृश्य जनसमुदाय वहां इकट्ठा हुआ था। मोटर से उतरने के बाद लाठी के सहारे लोगों का सहारा लेकर उन्हें मंच तक जाना पड़ा लेकिन भाषण देते वक्त एक स्टूल के सहारे वेखड़े रहे। इस अवसर पर उन्हें पांच हजार रुपयों की और एक हजार रुपयों की इस प्रकार से दो थैलियां दी गईं। उन्होंने में कहा-

25 साल पहले राजनीति में प्रवेश करते समय मेरे जीवन के तीन उद्देश्य थे। पहला, अस्पृश्यों के हर घर में ज्ञान की गंगा का प्रवाह पहुंचाना। इस उद्देश्य में मुझे काफी हद तक सफलता मिली है। कहा जा सकता है कि शिक्षा के क्षेत्र में आज अस्पृश्य लोग आगे भले न हों, मुझे आत्मविश्वास है कि कुछ ही दिनों में वे अच्छी प्रगति हासिल कर सकते हैं। मेरे कार्य का दूसरा महत्वपूर्ण उद्देश्य था सरकारी नौकरियों में अस्पृश्यों को व्यापक प्रतिनिधित्व दिलाना। मेरी कोशिश से प्राप्त सफलता आज आपके सामने है। इन दोनों उद्देश्यों में आज मुझे सफलता प्राप्त हुई है। लेकिन दूरदराज के गांवों में रहने वाले मेरे अनगिनत दलित बंधुओं की स्थिति में सुधार लाने के मेरे तीसरे उद्देश्य में मुझे अभी बहुत कम सफलता मिली है। इसीलिए, मेरी बची हुई जिंदगी और मेरा पूरा सामर्थ्य मैंने इन अस्पृश्य भाइयों के सर्वांगीण सुधार के लिए व्यतीत करने का निश्चय किया है।

जब तक वेखेती छोड़ कर शहरों में रहने नहीं आते तब तक उनके जीवन की

जनता, 24 मार्च, 1956