338 18-3-1956 रोटी से अधिक महत्व स्वाभिमान का है - आगरा - Page 425

406 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

बौद्ध बनने के बाद, लेकिन मैं राजनीति से अलग नहीं होऊंगा। केवल शेड्यूल्ड कास्टस् फेडरेशन के टिकट पर उम्मीदवार बन कर मैं चुनाव नहीं लडूंगा। मैं अपने बलबूते चुनाव लडूंगा। भले फिर मेरी विजय हो या मुझे हार का सामना करना पड़े। मुझे उसकी फिकर नहीं। मैं आप लोगों को हक और अधिकार दिलवाने जीवन के अंतिम सांस तक लड़ूंगा।

अर्थ मंत्री के पास तो नोन-तेल बेचने तक की अकल नहीं है। जो मिट्टी से जुड़ा काम तक करने की योग्यता नहीं रखते वे आज एम. पी. और एम. एल. ए. बन कर महीने की 400 रुपयों की तनख्वाह और 21 रुपयों का भत्ता ले रहे हैं।